JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ECONOMY · 2020

Previous Year Question

केन्द्रीय बजट 2020-21 के द्वारा उत्कृष्ट कार्पोरेट बाँड में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की सीमा बढ़ा दी गयी है—

A.

9% तक

B.

10% तक

C.

12% तक

D.

15% तक

Correct Answer: D

Detailed Solution

केंद्रीय बजट 2020–21 में भारत सरकार ने कॉर्पोरेट बॉण्ड (Corporate Bonds) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investment – FPI) की सीमा को बकाया कॉर्पोरेट बॉण्डों के कुल मूल्य के 9% से बढ़ाकर 15% करने की घोषणा की थी। यह घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2020 को बजट प्रस्तुत करते समय की थी।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का अर्थ विदेशी निवेशकों द्वारा किसी देश की वित्तीय परिसंपत्तियों, जैसे शेयर (Equities), बॉण्ड (Bonds) तथा अन्य प्रतिभूतियों (Securities) में किया जाने वाला निवेश है। इसमें निवेशक का उद्देश्य सामान्यतः वित्तीय प्रतिफल प्राप्त करना होता है, न कि संबंधित उद्यम के प्रबंधन पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करना।

कॉर्पोरेट बॉण्ड (Corporate Bond) कंपनियों द्वारा पूँजी जुटाने के लिए जारी किया जाने वाला ऋण साधन (Debt Instrument) है। बॉण्ड खरीदने वाला निवेशक कंपनी को धन उधार देता है, जिसके बदले कंपनी निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज तथा मूलधन का भुगतान करती है।

केंद्रीय बजट 2020–21 में FPI सीमा का परिवर्तन:

विवरण

सीमा

पूर्व निर्धारित सीमा

9%

बजट 2020–21 में घोषित सीमा

15%

वृद्धि

6 प्रतिशत अंक

यह सीमा किसी एक कंपनी में विदेशी स्वामित्व के प्रतिशत को नहीं, बल्कि भारत में बकाया कॉर्पोरेट बॉण्डों के कुल मूल्य के अनुपात में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की अनुमत सीमा को दर्शाती थी।

इस निर्णय का प्रमुख उद्देश्य भारतीय कॉर्पोरेट बॉण्ड बाजार (Corporate Bond Market) को विकसित करना, विदेशी पूँजी की उपलब्धता बढ़ाना तथा कंपनियों के लिए वित्तपोषण के स्रोतों का विस्तार करना था।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 30 मार्च, 2020 के अपने परिपत्र के माध्यम से वित्त वर्ष 2020–21 के लिए कॉर्पोरेट बॉण्डों में FPI की सीमा 15% निर्धारित की। इसके अंतर्गत निवेश सीमा को अप्रैल–सितंबर 2020 के लिए ₹4,29,244 करोड़ तथा अक्टूबर 2020–मार्च 2021 के लिए ₹5,41,488 करोड़ निर्धारित किया गया था।

भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पंजीकरण एवं प्रतिभूति बाजार से संबंधित नियमन में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की भूमिका होती है, जबकि ऋण प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश की सीमा तथा विदेशी मुद्रा संबंधी नियमों के क्रियान्वयन में RBI की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।

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