Previous Year Question
‘गरीबी के दुष्चक्र’ की अवधारणा किससे संबंधित है?
कार्ल मार्क्स
नर्कसे
एडम स्मिथ
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: B
Detailed Solution
‘गरीबी के दुष्चक्र’ (Vicious Circle of Poverty) की अवधारणा अर्थशास्त्री रैगनर नर्कसे (Ragnar Nurkse) से संबंधित है। उन्होंने अपनी पुस्तक Problems of Capital Formation in Underdeveloped Countries (1953) में इस अवधारणा का व्यवस्थित विश्लेषण किया था। इसके अनुसार, अल्पविकसित अर्थव्यवस्थाओं में गरीबी के विभिन्न आर्थिक कारण एक-दूसरे को मजबूत करते हैं, जिससे गरीबी लगातार बनी रह सकती है।
गरीबी का दुष्चक्र मुख्यतः दो पक्षों से संचालित होता है:
1. आपूर्ति पक्ष (Supply Side): कम आय के कारण बचत की क्षमता कम होती है। कम बचत से निवेश एवं पूँजी निर्माण (Capital Formation) सीमित रहता है। पूँजी की कमी के कारण श्रमिकों की उत्पादकता कम रहती है, जिससे आय पुनः निम्न स्तर पर बनी रहती है।
निम्न आय → निम्न बचत → निम्न निवेश → कम पूँजी निर्माण → निम्न उत्पादकता → निम्न आय
2. माँग पक्ष (Demand Side): कम आय के कारण लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) सीमित होती है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की बाजार माँग कम रहती है। बाजार के छोटे आकार के कारण उद्यमियों को नए निवेश के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता। सीमित निवेश के कारण उत्पादन क्षमता और उत्पादकता का विस्तार बाधित होता है तथा आय निम्न स्तर पर बनी रहती है।
निम्न आय → सीमित क्रय शक्ति → कम बाजार माँग → निवेश प्रोत्साहन में कमी → सीमित उत्पादन एवं उत्पादकता → निम्न आय
नर्कसे ने गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ने के लिए संतुलित विकास सिद्धांत (Balanced Growth Theory) पर बल दिया। इसके अंतर्गत विभिन्न उद्योगों और आर्थिक क्षेत्रों में समन्वित निवेश से उत्पादन क्षमता, रोजगार, आय तथा बाजार माँग को एक साथ बढ़ाने का विचार प्रस्तुत किया गया।
यह अवधारणा विकास अर्थशास्त्र (Development Economics) से संबंधित है। इसमें पूँजी की कमी केवल गरीबी का परिणाम नहीं, बल्कि गरीबी को बनाए रखने वाला एक कारण भी होती है।