Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में मुद्रा स्फीति के प्राक्कलन का सबसे प्रचलित माप है ?
मूल्य सूचकांक
थोक मूल्य सूचकांक
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
औद्योगिक वस्तुओं का मूल्य सूचकांक
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारत में वर्ष 2012 के संदर्भ में मुद्रास्फीति (Inflation) के आकलन का सबसे प्रचलित माप थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI) था। यह थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में समय के साथ होने वाले औसत परिवर्तन को दर्शाता है। उस समय भारत में प्रमुख मुद्रास्फीति संकेतक (Headline Inflation Indicator) के रूप में WPI का व्यापक उपयोग किया जाता था।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में प्राथमिक वस्तुएँ (Primary Articles), ईंधन एवं ऊर्जा (Fuel and Power) तथा विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products) शामिल होते हैं। इसमें कृषि उत्पाद, खनिज, पेट्रोलियम पदार्थ तथा विभिन्न औद्योगिक वस्तुएँ आती हैं। WPI में सेवाओं की कीमतें शामिल नहीं होती हैं।
भारत में WPI का संकलन एवं प्रकाशन आर्थिक सलाहकार कार्यालय (Office of Economic Adviser – OEA) द्वारा किया जाता है, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। वर्ष 2012 में प्रचलित WPI श्रृंखला का आधार वर्ष 2004–05 था।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतों में परिवर्तन को मापता है। इसमें भोजन, आवास, वस्त्र, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य उपभोग संबंधी मदें शामिल होती हैं। CPI का संबंध उपभोक्ताओं के जीवन-यापन की लागत (Cost of Living) से अधिक निकट होता है।
भारत में जनवरी 2011 से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों को शामिल करने वाली नई CPI श्रृंखला प्रारंभ की गई थी। बाद में मौद्रिक नीति व्यवस्था में परिवर्तन हुआ और वर्ष 2016 में Flexible Inflation Targeting Framework को वैधानिक आधार मिलने के बाद CPI-Combined मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण का प्रमुख संकेतक बन गया।
इस प्रकार, वर्ष 2012 में भारत में मुद्रास्फीति के आकलन के लिए WPI सबसे अधिक प्रचलित था, जबकि बाद की मौद्रिक नीति व्यवस्था में CPI-Combined को प्रमुख स्थान प्राप्त हुआ।