Previous Year Question
जस्टिस पार्टी के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
जस्टिस पार्टी ने काँग्रेस का विरोध उसे एक ब्राह्मण प्रभुत्व वाला संगठन कह कर किया।
इसने गैर-ब्राह्मणों के लिये वैसे ही साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व का दावा किया जैसा कि मार्ले-मिंटो सुधार ने मुसलमानों को दिया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1 और 2 दोनों
न तो 1 न ही 2
केवल 1
केवल 2
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है। जस्टिस पार्टी मद्रास प्रेसीडेंसी में विकसित गैर-ब्राह्मण राजनीतिक आंदोलन से संबंधित थी। इसने काँग्रेस को ब्राह्मण प्रभुत्व वाला संगठन बताते हुए उसका विरोध किया और तर्क दिया कि राजनीतिक तथा प्रशासनिक संस्थाओं में गैर-ब्राह्मण समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा था।
जस्टिस पार्टी का औपचारिक नाम South Indian Liberal Federation था। इसके राजनीतिक कार्यक्रम में गैर-ब्राह्मणों के लिए सरकारी सेवाओं तथा प्रतिनिधि संस्थाओं में अधिक अवसर और प्रतिनिधित्व प्राप्त करना प्रमुख विषय था।
कथन 2 भी सही है। जस्टिस पार्टी ने गैर-ब्राह्मणों के लिए साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व (communal representation) की माँग की और इसकी तुलना उस प्रतिनिधित्व से की जो मुसलमानों को Morley-Minto Reforms, 1909 के अंतर्गत दिया गया था।
Morley-Minto Reforms का महत्वपूर्ण चुनावी परिवर्तन मुसलमानों के लिए separate electorates की व्यवस्था था। जस्टिस पार्टी इसी प्रकार गैर-ब्राह्मणों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को संस्थागत रूप से सुरक्षित करना चाहती थी।
बाद में 1920 के मद्रास विधान परिषद चुनाव में काँग्रेस ने असहयोग आंदोलन के कारण चुनाव का बहिष्कार किया, जबकि जस्टिस पार्टी ने चुनाव में भाग लिया और सरकार बनाने की स्थिति में आई। इससे मद्रास प्रेसीडेंसी की राजनीति में जस्टिस पार्टी का प्रभाव बढ़ा।