JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2023

Previous Year Question

नीचे दो कथन हैं, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है –

अभिकथन (A) – किसी राज्य की सीमा बदलने की सिफारिश राष्ट्रपति संसद को देता है और इसके लिए राष्ट्रपति संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा उस प्रस्ताव पर विचार एक खास अवधि के भीतर प्राप्त करते हैं।

कारण (R) – राष्ट्रपति को उस राज्य विधानमंडल का प्रस्ताव मानना अनिवार्य नहीं है।

नीचे दिये गए कूट से सही उत्तर को चुनिए –

A.

(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है

B.

(A) और (R) दोनों सत्य हैं किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है

C.

(A) गलत है किन्तु (R) सत्य है

D.

(A) सत्य है किन्तु (R) गलत है

Correct Answer: B

Detailed Solution

यह प्रश्न संविधान के अनुच्छेद 3 पर आधारित है। अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद कानून द्वारा किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा या घटा सकती है, उसकी सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है तथा उसका नाम भी बदल सकती है।

अभिकथन (A) सत्य है। ऐसे उद्देश्य वाला विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। यदि विधेयक में किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम को प्रभावित करने वाला प्रस्ताव है, तो राष्ट्रपति उसे उस राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय व्यक्त करने के लिए भेजता है और इसके लिए एक अवधि निर्धारित की जाती है।

कारण (R) भी सत्य है। संबंधित राज्य विधानमंडल की राय प्राप्त करना संवैधानिक प्रक्रिया का भाग है, लेकिन उसकी राय बाध्यकारी नहीं है। संविधान संबंधित राज्य को अपनी views व्यक्त करने का अवसर देता है; अंतिम विधायी शक्ति संसद के पास रहती है। अनुच्छेद 3 राज्य विधानमंडल की consent नहीं, बल्कि उसके views प्राप्त करने की बात करता है।

लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता। अभिकथन उस संवैधानिक प्रक्रिया से संबंधित है जिसमें राष्ट्रपति की recommendation और State Legislature से views लेना आवश्यक है। कारण केवल यह बताता है कि राज्य विधानमंडल के views राष्ट्रपति अथवा संसद पर binding नहीं हैं। यह non-binding nature उस constitutional procedure का कारण नहीं बताती।

एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त तथ्य यह है कि अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 या 3 के अंतर्गत बनाई गई ऐसी विधि, जिससे First Schedule या Fourth Schedule में आवश्यक परिवर्तन हों, अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान संशोधन नहीं मानी जाती।

इसलिए परीक्षा में तीन बातें अलग रखनी चाहिए—President की recommendation आवश्यक है → प्रभावित State Legislature से views लेना आवश्यक है → State Legislature की consent आवश्यक नहीं है।

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