Previous Year Question
भारत में ‘पंचायती राज व्यवस्था का शिल्पी’ किसे कहा जाता है ?
आचार्य नरेन्द्र देव
जी. वी. के. राव
बी. आर. मेहता
एल. एम. सिंधवी
Correct Answer: C
Detailed Solution
वर्ष 1957 में बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता में गठित समिति ने Community Development Programme और National Extension Service के कामकाज की समीक्षा की तथा ग्रामीण विकास में जनता की वास्तविक भागीदारी के लिए लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर बल दिया।
समिति ने शासन और विकास संबंधी कुछ शक्तियाँ स्थानीय निर्वाचित संस्थाओं को सौंपने की सिफारिश की। इसका मूल विचार यह था कि स्थानीय विकास का कार्य केवल ऊपर से संचालित प्रशासन के माध्यम से न हो, बल्कि स्थानीय प्रतिनिधि संस्थाओं को वास्तविक उत्तरदायित्व और अधिकार दिए जाएँ।
समिति ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज संरचना की सिफारिश की—
ग्राम स्तर — ग्राम पंचायत → ब्लॉक स्तर — पंचायत समिति → जिला स्तर — जिला परिषद।
विशेष रूप से Block level पर निर्वाचित self-governing institution स्थापित करने तथा Panchayat Samiti को Village Panchayats से indirect election द्वारा गठित करने की सिफारिश की गई थी।
इन सिफारिशों ने स्वतंत्र भारत में आधुनिक Panchayati Raj व्यवस्था के संस्थागत विकास का आधार तैयार किया। बाद में 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान इस व्यवस्था को लागू करने वाला पहला राज्य बना।
इसी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण बलवंत राय मेहता को “Architect of the Panchayati Raj System” अर्थात् पंचायती राज व्यवस्था का शिल्पी कहा जाता है।
यहाँ अन्य समितियों से अंतर भी उपयोगी है—जी. वी. के. राव समिति ने बाद के समय में ग्रामीण विकास प्रशासन में Panchayati Raj Institutions की भूमिका मजबूत करने पर बल दिया, जबकि एल. एम. सिंघवी समिति ने Panchayats को constitutional recognition देने सहित महत्वपूर्ण सुधार सुझाए। लेकिन “पंचायती राज व्यवस्था का शिल्पी” पूछे जाने पर उत्तर बलवंत राय मेहता है।