JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2023

Previous Year Question

भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. महान्यायवादी के पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति होगी, जो कि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो।

  2. महान्यायवादी को उनके पद से उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जैसे कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए –

कूट –

A.

दोनों 1 तथा 2

B.

केवल 2

C.

न तो 1 न ही 2

D.

केवल 1

Correct Answer: D

Detailed Solution

कथन 1 सही है। संविधान के अनुच्छेद 76(1) के अनुसार राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करता है, जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो। इसलिए महान्यायवादी के लिए स्वयं Supreme Court Judge होना आवश्यक नहीं है; उसके पास Supreme Court Judge के लिए निर्धारित qualifications होना पर्याप्त है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यता के अनुसार व्यक्ति भारत का नागरिक हो तथा कम-से-कम 5 वर्ष किसी High Court का Judge, अथवा कम-से-कम 10 वर्ष किसी High Court का Advocate रहा हो, अथवा राष्ट्रपति की राय में distinguished jurist हो। यही qualification standard महान्यायवादी की नियुक्ति पर लागू होता है।

कथन 2 गलत है। महान्यायवादी को Supreme Court Judge की तरह विशेष संसदीय removal process से नहीं हटाया जाता। अनुच्छेद 76(4) के अनुसार महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है। संविधान उसके removal के लिए Supreme Court Judge जैसी impeachment-type प्रक्रिया निर्धारित नहीं करता।

यहीं Supreme Court Judge और Attorney General के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। Supreme Court Judge को proved misbehaviour या incapacity के आधार पर संविधान में निर्धारित विशेष संसदीय प्रक्रिया के बाद हटाया जा सकता है; जबकि महान्यायवादी का पद राष्ट्रपति के pleasure पर आधारित है।

महान्यायवादी का मुख्य कर्तव्य भारत सरकार को राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए विधिक विषयों पर सलाह देना और अन्य legal duties का निर्वहन करना है। अनुच्छेद 76(3) उसे भारत के क्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार (right of audience) भी देता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि महान्यायवादी का कोई निश्चित संवैधानिक कार्यकाल निर्धारित नहीं है और उसका पारिश्रमिक भी ऐसा होता है जैसा राष्ट्रपति निर्धारित करे।

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