JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2019

Previous Year Question

नीचे दो कथन दिए गए हैं जिनमें एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।

कथन (A) : केन्द्रीय कानूनों की सांविधानिक वैधता के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अनन्य अधिकारिता है।

कारण (R) : सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान का संरक्षक है।

नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए :

A.

(A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R) कथन (A) की सही व्याख्या है

B.

(A) तथा (R) दोनों सही हैं परन्तु (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है

C.

(A) सही है, किंतु (R) गलत है

D.

(A) गलत है, किंतु (R) सही है

Correct Answer: A

Detailed Solution

इस प्रश्न में आयोग की उपलब्ध उत्तर-कुंजी और संवैधानिक स्थिति में अंतर है। कुंजी में विकल्प (a) दिया गया है। हालांकि, केन्द्रीय कानूनों की सांविधानिक वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय की अनन्य अधिकारिता का दावा सही नहीं है।

कथन (A) गलत है। ‘अनन्य अधिकारिता’ का अर्थ है—किसी विषय पर केवल उसी न्यायालय को निर्णय करने का अधिकार होना। अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय भी केन्द्रीय कानूनों की सांविधानिक वैधता की जाँच कर सकते हैं। इसलिए यह अधिकार केवल सर्वोच्च न्यायालय तक सीमित नहीं है।

इस विषय का ऐतिहासिक आधार 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 है। इससे जोड़े गए अनुच्छेद 131A ने केन्द्रीय कानूनों की सांविधानिक वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय को अनन्य अधिकारिता दी थी। अनुच्छेद 226A ने उच्च न्यायालयों को ऐसी जाँच से रोका था।

बाद में 43वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 ने दोनों अनुच्छेद हटा दिए। यह परिवर्तन 13 अप्रैल 1978 से प्रभावी हुआ।

कारण (R) सही है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान की व्याख्या तथा मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, इसलिए उसे संविधान का संरक्षक कहा जाता है। अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय का संरक्षक होना उच्च न्यायालयों की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति को समाप्त नहीं करता।

अतः संवैधानिक आधार पर (A) गलत और (R) सही है—विकल्प (d)।

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