Previous Year Question
नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कार्यों के लिए राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व महत्त्वपूर्ण हैं।
कारण (R): नीति-निदेशक तत्त्वों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र स्थापित करना है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(A) तथा (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(A) गलत है, किन्तु (R) सही है।
(A) सही है, किन्तु (R) गलत है।
(A) तथा (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: D
Detailed Solution
भारतीय संविधान के भाग IV, अनुच्छेद 36 से 51 में राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों का प्रावधान है। ये तत्त्व शासन और कानून निर्माण में राज्य को सामाजिक तथा आर्थिक न्याय से संबंधित दिशा प्रदान करते हैं।
अभिकथन (A) सही है।
अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति-निदेशक तत्त्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन देश के शासन में मौलिक महत्त्व रखते हैं। कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
ये तत्त्व आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य के विभिन्न कार्यों से संबंधित हैं। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 38 सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित करता है। अनुच्छेद 39 आजीविका, संसाधनों के वितरण और आर्थिक असमानता से संबंधित सिद्धांत देता है।
इसी प्रकार अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों को स्वशासन की इकाइयों के रूप में संगठित करने तथा अनुच्छेद 50 राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने से संबंधित है।
कारण (R) सही है।
नीति-निदेशक तत्त्वों का प्रमुख उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र के साथ आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।
अनुच्छेद 38(2) राज्य को आय की असमानताओं को कम करने तथा व्यक्तियों और समूहों के बीच प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताएँ दूर करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
अनुच्छेद 39 में पर्याप्त आजीविका, समान कार्य के लिए समान वेतन और संसाधनों का सामान्य हित में वितरण जैसे सिद्धांत दिए गए हैं।
इन प्रावधानों से स्पष्ट है कि नीति-निदेशक तत्त्व लोकतांत्रिक शासन को सामाजिक और आर्थिक न्याय के उद्देश्यों से जोड़ते हैं।