Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (अनुसूची) | सूची-II (विषय) |
A. सातवीं अनुसूची | 1. भाषाएँ |
B. आठवीं अनुसूची | 2. दल-बदल के आधार पर निरर्हता |
C. नौवीं अनुसूची | 3. संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ |
D. दसवीं अनुसूची | 4. कतिपय अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण |
कूट:
A-3, B-1, C-2, D-4
A-3, B-1, C-4, D-2
A-2, B-3, C-4, D-1
A-4, B-2, C-1, D-3
Correct Answer: B
Detailed Solution
A. सातवीं अनुसूची — संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ (3)
सातवीं अनुसूची में विधायी विषयों का तीन सूचियों में विभाजन किया गया है—संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
संविधान के अनुच्छेद 246 के अनुसार संघ सूची के विषयों पर सामान्यतः संसद को और राज्य सूची के विषयों पर सामान्यतः राज्य विधानमंडलों को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है। समवर्ती सूची के विषयों पर संसद और राज्य विधानमंडल, दोनों कानून बना सकते हैं।
B. आठवीं अनुसूची — भाषाएँ (1)
आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं का उल्लेख है। वर्तमान में इसमें 22 भाषाएँ शामिल हैं।
मूल संविधान में आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएँ थीं। बाद में विभिन्न संविधान संशोधनों द्वारा अन्य भाषाएँ जोड़ी गईं।
आठवीं अनुसूची का संबंध अनुच्छेद 344(1) और अनुच्छेद 351 से है।
C. नौवीं अनुसूची — कतिपय अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण (4)
नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था।
यह अनुसूची अनुच्छेद 31B से संबंधित है। इसमें निर्दिष्ट अधिनियमों और विनियमों को मौलिक अधिकारों से संबंधित कुछ आधारों पर अमान्य घोषित किए जाने से संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है।
प्रारंभ में इसका उपयोग विशेष रूप से भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन से संबंधित कानूनों के संरक्षण के लिए किया गया था।
महत्त्वपूर्ण तथ्य: नौवीं अनुसूची में शामिल कानून न्यायिक समीक्षा से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कानूनों की भी संविधान की मूल संरचना के आधार पर समीक्षा की जा सकती है।
D. दसवीं अनुसूची — दल-बदल के आधार पर निरर्हता (2)
दसवीं अनुसूची को 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था।
इसमें संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की दल-बदल के आधार पर निरर्हता से संबंधित प्रावधान हैं।
उदाहरण के लिए, किसी राजनीतिक दल का सदस्य स्वेच्छा से अपने दल की सदस्यता छोड़ने या निर्धारित परिस्थितियों में दल के निर्देश के विरुद्ध मतदान करने पर निरर्हता के अधीन हो सकता है।
दल-बदल संबंधी निरर्हता के प्रश्न पर संबंधित सदन का अध्यक्ष या सभापति निर्णय करता है। यह निर्णय संवैधानिक सीमाओं के अधीन न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है।