Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-से जोड़े का मिलान सही नहीं है?
विधि के समक्ष समानता — नागरिकों एवं गैर-नागरिकों दोनों के लिए सुनिश्चित की गई है
लोक सेवाओं में अवसर की समानता — केवल भारत के नागरिकों के लिए सुनिश्चित है
किसी नए राज्य की स्थापना करना — संसद की शक्ति
किसी राज्य का नाम बदलना — राज्य विधान-मंडल की शक्तियाँ
Correct Answer: D
Detailed Solution
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार किसी राज्य के नाम में परिवर्तन करने की शक्ति संसद को प्राप्त है, राज्य विधानमंडल को नहीं।
विकल्प (a) सही सुमेलित है।
संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण का अधिकार दिया गया है।
इस अनुच्छेद में 'किसी व्यक्ति' शब्द का प्रयोग किया गया है। इसलिए इसका संरक्षण भारतीय नागरिकों के साथ-साथ भारत के राज्यक्षेत्र में उपस्थित गैर-नागरिकों को भी प्राप्त होता है।
अनुच्छेद 14 का उद्देश्य राज्य द्वारा मनमाने और अनुचित भेदभाव को रोकना है। हालाँकि, यह युक्तियुक्त आधार पर किए गए वर्गीकरण को प्रतिबंधित नहीं करता।
विकल्प (b) सही सुमेलित है।
अनुच्छेद 16(1) के अनुसार राज्य के अधीन नियोजन या किसी पद पर नियुक्ति से संबंधित मामलों में सभी नागरिकों को अवसर की समानता प्राप्त है।
यह मौलिक अधिकार केवल भारतीय नागरिकों के लिए है। गैर-नागरिक अनुच्छेद 16 के अंतर्गत लोक नियोजन में अवसर की समानता के अधिकार का दावा नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 16(2) धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, वंश, जन्मस्थान और निवास जैसे निर्दिष्ट आधारों पर लोक नियोजन में भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।
विकल्प (c) सही सुमेलित है।
संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को कानून बनाकर नए राज्यों के निर्माण और मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमाओं अथवा नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान करता है।
संसद किसी राज्य का क्षेत्र अलग करके, दो या अधिक राज्यों अथवा उनके भागों को मिलाकर या किसी क्षेत्र को किसी राज्य के भाग से मिलाकर नया राज्य बना सकती है।
इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्यों के संघ में प्रवेश या उनकी स्थापना से संबंधित शक्ति प्रदान करता है।
विकल्प (d) गलत सुमेलित है।
अनुच्छेद 3(e) के अनुसार किसी राज्य का नाम बदलने की शक्ति संसद को प्राप्त है।
ऐसा विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में प्रस्तुत किया जाता है। जब प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति उसे संबंधित राज्य विधानमंडल को निर्धारित अवधि में अपने विचार व्यक्त करने के लिए भेजते हैं।
राज्य विधानमंडल के विचार संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होते। इसलिए राज्य विधानमंडल की सहमति के बिना भी निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार संसद राज्य का नाम बदल सकती है।
महत्त्वपूर्ण तथ्य: अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्य के नाम परिवर्तन संबंधी कानून सामान्यतः संसद में साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है। अनुच्छेद 4 के अनुसार ऐसे कानून को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान संशोधन नहीं माना जाता।
इस प्रकार नए राज्य का निर्माण और किसी राज्य का नाम बदलना, दोनों संसद की शक्तियाँ हैं।