JAGTIV · Previous Year Questions

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POLITY · 2024

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन-से भारत के निर्वाचन आयुक्त के कार्य हैं?

  1. लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा के उपसभापति के पदों के लिए चुनाव कराना।

  2. नगर निगमों और नगरपालिकाओं के चुनाव कराना।

  3. उपर्युक्त चुनावों से उत्पन्न सभी शंकाओं और विवादों पर निर्णय करना।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।

A.

2 और 3

B.

1 और 2

C.

1 और 3

D.

उपर्युक्त में से कोई नहीं

Correct Answer: D

Detailed Solution

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण सौंपा गया है।

लेकिन प्रश्न में दिए गए तीनों कार्य भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं हैं।

कथन 1 गलत है।

लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं कराया जाता।

संविधान के अनुच्छेद 93 के अनुसार लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है।

इसी प्रकार अनुच्छेद 89(2) के अनुसार राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है।

इन पदों के चुनाव संबंधित सदनों की आंतरिक संसदीय प्रक्रिया के अंतर्गत आते हैं।

महत्त्वपूर्ण अंतर: भारत निर्वाचन आयोग लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के चुनावों का संचालन करता है, लेकिन इन सदनों के पीठासीन अधिकारियों के चुनावों का संचालन नहीं करता।

कथन 2 गलत है।

नगर निगमों और नगरपालिकाओं के चुनावों का संचालन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं, बल्कि संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 243ZA के अंतर्गत नगरपालिकाओं के चुनावों के लिए निर्वाचक नामावलियों की तैयारी तथा चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपा गया है।

अनुच्छेद 243K पंचायतों के चुनावों से संबंधित है। इसके अंतर्गत भी चुनावों के संचालन का दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग को दिया गया है।

इसलिए स्थानीय निकायों के चुनावों और संसद एवं राज्य विधानमंडलों के चुनावों के लिए अलग-अलग संवैधानिक चुनाव संस्थाओं की व्यवस्था है।

कथन 3 गलत है।

भारत निर्वाचन आयोग उपर्युक्त चुनावों से उत्पन्न सभी शंकाओं और विवादों का निर्णय करने वाला प्राधिकारी नहीं है।

लोकसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव संबंधित सदनों की संसदीय प्रक्रिया से संचालित होते हैं। नगरपालिकाओं के चुनावों से जुड़े विवादों का निस्तारण संबंधित राज्य कानूनों के अनुसार किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित संसदीय और विधानसभा चुनावों के परिणामों से संबंधित विवाद भी आयोग स्वयं अंतिम रूप से तय नहीं करता।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अंतर्गत ऐसे चुनावों को चुनाव याचिका द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से संबंधित विवादों का निर्णय उच्चतम न्यायालय करता है।

इस प्रकार चुनावों का संचालन करना और उनसे संबंधित सभी विवादों का न्यायिक निर्णय करना अलग-अलग कार्य हैं।

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