Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म (अनुसूची - विषय) सही सुमेलित नहीं है?
तृतीय अनुसूची - शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप
नौवीं अनुसूची - राज्य सभा में स्थानों का आवंटन
आठवीं अनुसूची - भाषाएँ
दसवीं अनुसूची - दल-बदल के आधार पर निरर्हता संबंधी प्रावधान
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची का संबंध राज्य सभा की सीटों के आवंटन से नहीं है। राज्य सभा में राज्यों और संबंधित संघ राज्य क्षेत्रों के लिए सीटों के आवंटन का प्रावधान चौथी अनुसूची में किया गया है।
(a) तृतीय अनुसूची — शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप
तृतीय अनुसूची में विभिन्न संवैधानिक पदों के लिए शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप निर्धारित किए गए हैं।
इसमें केंद्रीय मंत्रियों, संसद सदस्यों, राज्य मंत्रियों, राज्य विधानमंडलों के सदस्यों, उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के लिए शपथ के प्रारूप शामिल हैं।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की शपथ के प्रावधान क्रमशः अनुच्छेद 60 और 69 में दिए गए हैं।
(b) नौवीं अनुसूची — राज्य सभा में स्थानों का आवंटन
नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा संविधान में शामिल किया गया था।
यह अनुसूची अनुच्छेद 31B से संबंधित है। इसमें निर्दिष्ट अधिनियमों और विनियमों को संविधान द्वारा विशेष संरक्षण प्रदान किया गया था। प्रारंभ में इसका प्रमुख उद्देश्य भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन से संबंधित कानूनों को संरक्षण देना था।
हालाँकि नौवीं अनुसूची में शामिल कानून न्यायिक पुनरावलोकन से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि 24 अप्रैल 1973 के बाद इस अनुसूची में शामिल किए गए कानूनों की मूल संरचना सिद्धांत के आधार पर न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
राज्य सभा में सीटों का आवंटन चौथी अनुसूची में दिया गया है। यह अनुच्छेद 4(1) और 80(2) से संबंधित है।
(c) आठवीं अनुसूची — भाषाएँ
आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएँ शामिल हैं।
मूल संविधान में 14 भाषाएँ थीं। बाद के संविधान संशोधनों के माध्यम से इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई।
92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को इस अनुसूची में शामिल किया गया।
(d) दसवीं अनुसूची — दल-बदल के आधार पर निरर्हता
दसवीं अनुसूची को 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा संविधान में शामिल किया गया था।
इसके अंतर्गत सांसदों और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की दल-बदल के आधार पर निरर्हता से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
किसी राजनीतिक दल का सदस्य स्वेच्छा से अपनी दलगत सदस्यता छोड़ता है या निर्धारित परिस्थितियों में पार्टी के निर्देश के विरुद्ध मतदान करता है, तो वह निरर्हता के अधीन हो सकता है।
दसवीं अनुसूची के अंतर्गत निरर्हता से संबंधित प्रश्न का निर्णय संबंधित सदन का अध्यक्ष या सभापति करता है। यह निर्णय न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन है।