JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2017

Previous Year Question

नीचे दो कथन दिए गए हैं :

अभिकथन (A) : भारत में न्यायिक पुनरीक्षण का क्षेत्र सीमित है।

कारण (R) : भारतीय संविधान में कुछ ‘‘उधार की वस्तुएँ’’ हैं।

सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट की सहायता से करें :

A.

(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।

B.

(A) और (R) दोनों सत्य हैं लेकिन (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

C.

(A) सही है तथा (R) गलत है।

D.

(A) गलत है तथा (R) सही है।

Correct Answer: B

Detailed Solution

इस प्रश्न में अभिकथन (A) को comparative constitutional sense में समझना चाहिए। Judicial Review का अर्थ यह नहीं है कि न्यायालय हर कानून या सरकारी निर्णय के गुण-दोष पर दोबारा निर्णय करता है। न्यायालय मुख्यतः यह जाँचता है कि legislative या executive action संविधान के अनुरूप है या नहीं। NCERT भी Judicial Review को कानून की constitutionality की जाँच करने की शक्ति के रूप में स्पष्ट करता है।

भारत में Judicial Review का प्रमुख संवैधानिक आधार Article 13, Article 32 तथा Article 226 हैं। Fundamental Rights का उल्लंघन करने वाला कानून असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है; Supreme Court और High Courts constitutional remedies तथा writ jurisdiction का प्रयोग करते हैं। Supreme Court ने Judicial Review को संविधान की Basic Structure का हिस्सा भी माना है।

इसलिए “सीमित” का अर्थ यह नहीं है कि भारतीय न्यायपालिका कमजोर है। इसका अर्थ यह है कि Judicial Review constitutional and legal limits के भीतर किया जाता है; न्यायालय सामान्यतः legislature या executive के स्थान पर बैठकर policy merits पर अपना निर्णय नहीं देता। आधुनिक भारतीय व्यवस्था में Judicial Review का क्षेत्र काफी व्यापक है और Fundamental Rights, legislative competence तथा constitutional limitations तक फैला हुआ है।

कारण (R) भी सही है कि भारतीय संविधान ने विभिन्न देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं से अनेक संस्थागत विशेषताएँ ग्रहण की हैं। लेकिन संविधान में borrowed provisions होना Judicial Review के scope के सीमित होने का कारण नहीं है। दोनों कथन factual रूप से सही हैं, पर उनके बीच cause-and-effect relationship नहीं है।

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