Previous Year Question
भारत में, नागरिकों के मौलिक अधिकारों में संशोधन कौन कर सकता है?
लोक सभा
राज्य सभा
संसद
सर्वोच्च न्यायालय
Correct Answer: C
Detailed Solution
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368(1) के अनुसार संसद अपनी Constituent Power का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी भी प्रावधान में addition, variation या repeal के माध्यम से संशोधन कर सकती है। इसलिए Part III में दिए गए Fundamental Rights में संशोधन करने की संवैधानिक शक्ति भी संसद के पास है।
24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 ने इस स्थिति को और स्पष्ट किया। इसके द्वारा Article 368 में Parliament की Constituent Power को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई तथा Article 13(4) जोड़ा गया, जिसके अनुसार Article 368 के अंतर्गत किए गए Constitutional Amendment पर Article 13 लागू नहीं होगा।
लेकिन संसद की यह संशोधन शक्ति असीमित नहीं है। Kesavananda Bharati case (1973) के बाद Parliament Fundamental Rights सहित संविधान के प्रावधानों में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन ऐसा संशोधन संविधान की Basic Structure को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकता।
Constitution Amendment Bill को संसद के प्रत्येक सदन में अलग-अलग कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है। इसलिए केवल Lok Sabha या केवल Rajya Sabha अकेले Fundamental Rights में संशोधन नहीं कर सकती; Supreme Court की भूमिका Constitutional Amendments की Judicial Review करने की है, संविधान में संशोधन करने की नहीं।