JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2015

Previous Year Question

निम्नलिखित में से किस वाद में भारतीय संविधान के मूल संरचना के सिद्धांत की रूपरेखा प्रतिपादित की गई ?

A.

गोपालन बनाम मद्रास राज्य

B.

गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य

C.

केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य

D.

उपर्युक्त में से कोई नहीं

Correct Answer: C

Detailed Solution

भारतीय संविधान के Basic Structure Doctrine का प्रतिपादन Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) में हुआ। Supreme Court की 13-न्यायाधीशीय पीठ ने 24 अप्रैल 1973 को यह ऐतिहासिक निर्णय दिया।

निर्णय का मूल सिद्धांत यह था कि संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान में व्यापक संशोधन कर सकती है, लेकिन संविधान के मूल ढाँचे या पहचान को नष्ट नहीं कर सकती। यही आगे चलकर Basic Structure Doctrine कहलाया।

Chief Justice S. M. Sikri ने जिन विशेषताओं को मूल संरचना के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया, उनमें संविधान की सर्वोच्चता, गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था, धर्मनिरपेक्ष चरित्र, शक्तियों का पृथक्करण और संघीय चरित्र शामिल थे। यह सूची exhaustive नहीं मानी गई; बाद के निर्णयों ने basic structure के विभिन्न तत्वों को और विकसित किया।

Golak Nath v. State of Punjab (1967) इससे पहले का महत्वपूर्ण मामला था। उसमें Fundamental Rights में संशोधन की संसद की शक्ति पर प्रश्न उठा था, लेकिन Basic Structure Doctrine का प्रतिपादन Golak Nath में नहीं हुआ।

A. K. Gopalan v. State of Madras मुख्यतः personal liberty और preventive detention से संबंधित प्रारंभिक संवैधानिक मामला था; यह basic structure doctrine का स्रोत नहीं है।

इसलिए chronology याद रखें: Golak Nath (1967) → amendment power पर महत्वपूर्ण विवाद; Kesavananda Bharati (1973) → Basic Structure Doctrine.

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