JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2014

Previous Year Question

निम्नलिखित में से किस वाद, में भारतीय संविधान के ‘मूलभूत ढाँचे’ की अवधारणा प्रतिपादित की गयी थी ?

A.

इन्द्रा साहनी वाद

B.

शंकरी प्रसाद का वाद

C.

रुदल शाह का वाद

D.

उपर्युक्त में से कोई नहीं

Correct Answer: D

Detailed Solution

भारतीय संविधान के Basic Structure Doctrine का प्रतिपादन केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973) में किया गया था। यह मामला 13 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने तय किया और निर्णय 24 अप्रैल 1973 को दिया गया।

इस निर्णय में 7:6 के बहुमत से माना गया कि संसद को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान में संशोधन की व्यापक शक्ति प्राप्त है, लेकिन वह संविधान के मूलभूत ढाँचे या framework को नष्ट अथवा परिवर्तित नहीं कर सकती।

इसीलिए दिए गए तीनों मामलों में से कोई भी Basic Structure Doctrine का मूल वाद नहीं है।

इन्द्रा साहनी वाद मुख्यतः आरक्षण और पिछड़े वर्गों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय है; यह Basic Structure Doctrine के उद्भव का मामला नहीं था।

शंकरी प्रसाद वाद संविधान संशोधन की शक्ति और Fundamental Rights से संबंधित प्रारंभिक मामला था, लेकिन उस समय Basic Structure Doctrine प्रतिपादित नहीं हुआ था।

रुदल शाह वाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अवैध निरुद्धता के लिए compensation से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय था; इसका Basic Structure Doctrine के प्रतिपादन से संबंध नहीं है।

इसलिए targeted chronology याद रखें—

Shankari Prasad → Amendment power पर प्रारंभिक निर्णय
Kesavananda Bharati, 1973 → Basic Structure Doctrine
Indra Sawhney → Reservation/Equality से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय

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