JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2012

Previous Year Question

राज्य विधान सभा में कोई भी धन विधेयक पुरः स्थापित नहीं किया जा सकता, बगैर

A.

संसद की संस्तुति के

B.

राज्य के राज्यपाल की संस्तुति के

C.

भारत के राष्ट्रपति की संस्तुति के

D.

मंत्रियों की विशेष समिति की संस्तुति के

Correct Answer: B

Detailed Solution

सही उत्तर राज्य के राज्यपाल की संस्तुति है। संविधान के अनुच्छेद 207(1) के अनुसार अनुच्छेद 199(1) के खंड (a) से (f) में वर्णित वित्तीय विषयों से संबंधित विधेयक या संशोधन राज्यपाल की संस्तुति के बिना प्रस्तुत या प्रस्तावित नहीं किया जा सकता। ऐसा विधेयक विधान परिषद में प्रस्तुत भी नहीं किया जा सकता।

राज्य स्तर पर धन विधेयक की परिभाषा अनुच्छेद 199 में दी गई है। इसमें करों का अधिरोपण, समाप्ति या विनियमन; राज्य द्वारा धन उधार लेना; राज्य की संचित निधि या आकस्मिकता निधि से संबंधित विषय; तथा संचित निधि से धन के विनियोग जैसे विषय आते हैं।

यदि किसी राज्य में विधान परिषद भी है, तब भी धन विधेयक केवल विधान सभा में प्रस्तुत होता है। विधान सभा से पारित होने के बाद इसे विधान परिषद को उसकी सिफारिशों के लिए भेजा जाता है और परिषद को इसे 14 दिनों के भीतर वापस करना होता है। विधान सभा परिषद की सभी, कुछ या किसी भी सिफारिश को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।

यदि विधान परिषद 14 दिनों में धन विधेयक वापस नहीं करती, तो वह उसी रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है जिस रूप में विधान सभा ने उसे पारित किया था। इसलिए धन विधेयक के मामले में विधान सभा की स्थिति विधान परिषद से अधिक शक्तिशाली होती है।

एक और महत्वपूर्ण तथ्य है कि राज्यपाल धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानमंडल को वापस नहीं भेज सकता। अनुच्छेद 200 में विधेयक वापस करने की शक्ति के साथ स्पष्ट अपवाद है—यदि वह Money Bill नहीं है तभी उसे पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सकता है।

इस प्रश्न में “संस्तुति” शब्द महत्वपूर्ण है। केवल राष्ट्रपति, संसद या मंत्रियों की किसी विशेष समिति की अनुमति पर्याप्त नहीं है; संवैधानिक आवश्यकता राज्यपाल की recommendation है।

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