Previous Year Question
निम्न में से कौन एक रिट न्यायालय में कार्यवाही लंबित होने की दशा में लागू की जाती है?
परमादेश
उत्प्रेषण
प्रतिषेध
अधिकार पृच्छा
Correct Answer: C
Detailed Solution
Writ of Prohibition एक preventive writ है। इसे उच्चतर न्यायालय किसी अधीनस्थ न्यायालय या न्यायाधिकरण को तब जारी करता है जब वह ऐसी कार्यवाही कर रहा हो जो उसके jurisdiction के बाहर हो, jurisdiction से अधिक हो, अथवा ऐसी स्थिति हो जिसमें आगे की कार्यवाही विधिसम्मत न हो। इसका मूल उद्देश्य गलत कार्यवाही को आगे बढ़ने से रोकना है।
इस प्रश्न में सबसे महत्वपूर्ण शब्द “कार्यवाही लंबित होने की दशा में” है। Supreme Court ने Hari Vishnu Kamath v. Syed Ahmad Ishaque में Prohibition और Certiorari के बीच यही मूल अंतर स्पष्ट किया था—यदि inferior court में proceedings अभी चल रही हैं, तो Prohibition द्वारा उनकी further continuation रोकी जा सकती है; लेकिन कार्यवाही समाप्त होकर निर्णय हो जाने के बाद सामान्यतः उस निर्णय को quash करने के लिए Certiorari उपयुक्त remedy होती है।
इसलिए दोनों writs को इस प्रकार याद किया जा सकता है—
Prohibition → कार्यवाही अभी pending है → “रुको, आगे मत बढ़ो।”
Certiorari → निर्णय/order हो चुका है → “रिकॉर्ड मँगाकर गलत आदेश को quash करो।”
Mandamus (परमादेश) का उद्देश्य किसी public authority को उसका वैधानिक/public duty पूरा करने का आदेश देना है। Quo Warranto (अधिकार पृच्छा) में यह पूछा जाता है कि कोई व्यक्ति किसी public office को किस वैधानिक अधिकार से धारण कर रहा है। अतः ये दोनों इस प्रश्न की pending judicial proceedings वाली स्थिति से संबंधित नहीं हैं।
संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत Supreme Court तथा अनुच्छेद 226 के अंतर्गत High Courts को Prohibition सहित constitutional writs जारी करने की शक्ति प्राप्त है; High Courts की writ jurisdiction Fundamental Rights के अतिरिक्त अन्य विधिक उद्देश्यों तक भी विस्तृत है।