Previous Year Question
दक्षिण भारत की नदियों का प्रमुख रूप से अपवाह प्रतिरूप होता है :
अरीय
खण्डित
वृक्षाकार
जालीनुमा
Correct Answer: C
Detailed Solution
वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप में मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों का जाल देखने में वृक्ष के तने और उसकी शाखाओं जैसा दिखाई देता है। छोटी धाराएँ बड़ी धाराओं से जुड़ती हुई अंततः मुख्य नदी में मिलती हैं।
यह प्रतिरूप सामान्यतः ऐसे क्षेत्रों में अच्छी तरह विकसित होता है जहाँ चट्टानों की प्रकृति अपेक्षाकृत समान (homogeneous lithology) होती है तथा नदी के मार्ग पर folds, faults या अत्यधिक structural control का प्रभाव कम होता है। इसलिए धाराएँ किसी निश्चित संरचनात्मक दिशा से बंधने के बजाय प्राकृतिक ढाल के अनुसार शाखाओं के रूप में विकसित होती हैं।
दक्षिण भारत का प्रायद्वीपीय भू-भाग बहुत पुराना और बड़े क्षेत्र में कठोर crystalline rocks से निर्मित है। यहाँ अनेक नदी द्रोणियों में dendritic से sub-dendritic drainage network विकसित हुआ है। दक्षिण भारत के कई Western Ghats तथा Peninsular basins के वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इस प्रकार का pattern दर्ज किया गया है।