Previous Year Question
1924 का बंगाल का ‘तारकेश्वर आन्दोलन’ निम्न में से किसके विरुद्ध था ?
मंदिरों में भ्रष्टाचार
हिंसा
राजनैतिक नेताओं की गिरफ्तारी
साम्प्रदायिकता
Correct Answer: A
Detailed Solution
तारकेश्वर आंदोलन या Tarakeswar Satyagraha 1924 में बंगाल में हुआ था। इसका संबंध प्रसिद्ध तारकेश्वर शिव मंदिर और उससे जुड़ी मठ-व्यवस्था में भ्रष्टाचार तथा कुप्रबंधन के आरोपों से था।
उस समय Tarakeswar Math के महंत सतीश चन्द्र गिरि के व्यक्तिगत आचरण तथा मंदिर को प्राप्त संपत्ति और धन के प्रशासन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी धार्मिक प्रथा का विरोध करना नहीं था, बल्कि मंदिर और उसकी संपत्ति को भ्रष्ट प्रबंधन से मुक्त कर अधिक उत्तरदायी सार्वजनिक व्यवस्था के अंतर्गत लाना था।
प्रारंभिक प्रयासों से स्थिति नहीं सुधरने पर 1924 में बंगाल कांग्रेस के नेतृत्व में आंदोलन तेज हुआ। देशबंधु चित्तरंजन दास (C. R. Das) ने भी इसमें महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान किया।
सत्याग्रहियों ने शांतिपूर्ण ढंग से मंदिर और उससे जुड़ी संपत्ति के प्रशासन में सुधार की मांग की। आंदोलन के दौरान पुलिस हस्तक्षेप और गिरफ्तारियों के कारण यह धार्मिक-सुधार के प्रश्न से आगे बढ़कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा भी बन गया।
Prime Ministers Museum & Library के ऐतिहासिक अध्ययन में Tarakeswar Satyagraha को C. R. Das के नेतृत्व वाला स्थानीय अहिंसक आंदोलन बताया गया है, जिसका सीधा लक्ष्य एक स्थानीय मंदिर में भ्रष्टाचार था।
अतः 1924 का तारकेश्वर आंदोलन मंदिरों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध था।