JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2014

Previous Year Question

निम्नलिखित में से किसने 1947 के काँग्रेस कमेटी की बैठक द्वारा विभाजन के प्रस्ताव के पारित होने को ‘राष्ट्रवाद का सम्प्रदायवाद के पक्ष में समर्पण’ के रूप में लिया ?

A.

डॉ. किचलू

B.

पुरुषोत्तम दास टंडन

C.

जवाहरलाल नेहरू

D.

जी. बी. पन्त

Correct Answer: A

Detailed Solution

ब्रिटिश सरकार ने 3 जून 1947 को सत्ता हस्तांतरण से संबंधित योजना प्रस्तुत की, जिसमें भारत के विभाजन की प्रक्रिया भी शामिल थी।

इस योजना पर विचार करने के लिए All India Congress Committee (AICC) की आपात बैठक 14 और 15 जून 1947 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। कांग्रेस ने परिस्थितियों को देखते हुए 3 जून की योजना और उससे उत्पन्न विभाजन की संभावना को स्वीकार किया।

लेकिन कांग्रेस के भीतर सभी नेता विभाजन स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे। डॉ. सैफुद्दीन किचलू विभाजन के प्रबल विरोधी थे और वे एक संयुक्त भारत के समर्थक बने रहे।

किचलू ने कांग्रेस द्वारा विभाजन स्वीकार किए जाने को “राष्ट्रवाद का सम्प्रदायवाद के पक्ष में समर्पण” माना। उनका विचार था कि धार्मिक आधार पर देश का विभाजन भारतीय राष्ट्रवाद के उस सिद्धांत के विपरीत था, जिसके लिए स्वतंत्रता आंदोलन ने लंबे समय तक संघर्ष किया था।

किचलू का मानना था कि विभाजन से विशेष रूप से भारतीय मुसलमानों के राजनीतिक और आर्थिक हित कमजोर होंगे। दूसरी ओर, कांग्रेस के जिन नेताओं ने योजना स्वीकार की, उन्होंने तत्कालीन सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक गतिरोध और शीघ्र सत्ता हस्तांतरण जैसी परिस्थितियों को अपने निर्णय का आधार बताया।

इसलिए प्रश्न में दिया गया कथन डॉ. सैफुद्दीन किचलू से संबंधित है।

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