Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
बिहार में जगदीशपुर के जमींदार, कुँवर सिंह ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया।
लॉर्ड डलहौजी ने रानी लक्ष्मी बाई के दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी होने की मान्यता प्रदान की।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
केवल 2
न तो 1 न ही 2
केवल 1
1 और 2 दोनों
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1 सही है। कुँवर सिंह बिहार के जगदीशपुर के बड़े जमींदार थे और 1857 के विद्रोह में बिहार के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में से एक बने। ऐतिहासिक अभिलेख उन्हें जगदीशपुर का प्रभावशाली landholder तथा 1857–58 के विद्रोह का महत्त्वपूर्ण सैन्य नेता बताते हैं।
जुलाई 1857 में दानापुर के विद्रोही सिपाही आरा पहुँचे, जहाँ कुँवर सिंह उनके साथ जुड़े। उन्होंने विद्रोही सैनिकों का नेतृत्व संभाला और आरा तथा शाहाबाद क्षेत्र में ईस्ट इंडिया कम्पनी की सत्ता को गंभीर चुनौती दी।
उनका प्रभाव केवल एक सैनिक अभियान तक सीमित नहीं रहा। शाहाबाद के बड़े हिस्से पर विद्रोहियों का प्रभाव स्थापित होने के बाद कुँवर सिंह ने स्थानीय प्रशासन चलाने का भी प्रयास किया और अन्य विद्रोही नेताओं से संपर्क बनाए रखा। इसलिए उन्हें बिहार में 1857 के विद्रोह के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है।
कथन 2 गलत है। लॉर्ड डलहौजी की Doctrine of Lapse के अंतर्गत किसी देशी शासक के दत्तक पुत्र को राज्य के राजनीतिक उत्तराधिकार का स्वतः अधिकार स्वीकार नहीं किया जाता था। इस नीति के आधार पर सतारा, सम्बलपुर, झाँसी और नागपुर सहित कई राज्यों को कम्पनी में मिला लिया गया।
झाँसी के मामले में रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र के उत्तराधिकार के दावे को स्वीकार करने के बजाय ब्रिटिश सरकार ने झाँसी को 1854 में अपने अधीन कर लिया। इसलिए यह कहना कि डलहौजी ने दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी की मान्यता दी थी, तथ्यात्मक रूप से उल्टा है।
यही झाँसी की रानी और ब्रिटिश सरकार के बीच असंतोष के प्रमुख राजनीतिक कारणों में से एक बना और आगे चलकर 1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि से जुड़ गया।