Previous Year Question
नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A) : प्रारम्भिक राष्ट्रवादियों में से अधिकांश को ब्रिटिश राज ईश्वरीय देन लगता था जिसका उद्देश्य आधुनिकीकरण लाना था।
कारण (R) : उनकी शिकायत केवल भारत में “अन-ब्रिटिश राज” के खिलाफ थी।
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए :
(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(A) गलत है, किन्तु (R) सही है।
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) सही है, किन्तु (R) गलत है।
Correct Answer: C
Detailed Solution
अभिकथन (A) सही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारम्भिक राष्ट्रवादी अथवा Moderates ब्रिटिश शासन के प्रति बाद के उग्र राष्ट्रवादियों जैसा पूर्ण अस्वीकार का दृष्टिकोण नहीं रखते थे। वे ब्रिटिश शासन के माध्यम से आधुनिक शिक्षा, कानून, राजनीतिक संस्थाओं और प्रशासनिक एकीकरण के विकास की संभावना देखते थे।
विश्वविद्यालयीय इतिहास सामग्री में भी Moderates द्वारा भारत में ब्रिटिश आगमन को “beneficial and providential” मानने का उल्लेख मिलता है। वे मानते थे कि ब्रिटिश संपर्क का उपयोग भारतीय समाज और राजनीतिक संस्थाओं के सुधार के लिए किया जा सकता है।
इसी कारण प्रारम्भिक राष्ट्रवादी तत्काल ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के बजाय संवैधानिक और प्रशासनिक सुधारों की माँग करते थे। वे petitions, resolutions, memorials और ब्रिटिश जनमत पर प्रभाव डालने जैसे संवैधानिक साधनों को महत्त्व देते थे।
कारण (R) भी सही है। प्रारम्भिक राष्ट्रवादियों ने औपनिवेशिक शासन की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों की गंभीर आलोचना की, लेकिन उस आलोचना को प्रायः ब्रिटिश शासन के घोषित उदार सिद्धांतों से विचलन के रूप में प्रस्तुत किया।
इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण दादाभाई नौरोजी हैं। उन्होंने भारत से धन-निकासी, गरीबी और औपनिवेशिक आर्थिक शोषण की आलोचना करते हुए अपनी प्रसिद्ध कृति का नाम ही Poverty and Un-British Rule in India रखा। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में लागू नीतियाँ स्वयं ब्रिटिश न्याय और उदार सिद्धांतों के विरुद्ध थीं।
यही बिंदु (R) को (A) से जोड़ता है। क्योंकि प्रारम्भिक राष्ट्रवादियों के एक बड़े हिस्से को अभी भी ब्रिटिश राजनीतिक परंपरा और उसके घोषित उदार आदर्शों में विश्वास था, इसलिए वे समस्या को केवल “British” शासन होने में नहीं, बल्कि उसके “Un-British” तरीके से चलाए जाने में देखते थे।
यहाँ “केवल” शब्द को प्रश्न की ऐतिहासिक framing में समझना चाहिए—इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रारम्भिक राष्ट्रवादियों ने केवल एक ही समस्या उठाई; उन्होंने गरीबी, Drain of Wealth, सेवाओं में भेदभाव, ऊँचे प्रशासनिक खर्च और प्रतिनिधित्व की कमी जैसे अनेक मुद्दे उठाए। आशय यह है कि उस चरण में उनकी राजनीतिक आलोचना ब्रिटिश संबंध के तत्काल अंत के बजाय उसके अन्यायपूर्ण और ‘Un-British’ स्वरूप को सुधारने पर केंद्रित थी।