Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर दीजिए :
सूची-I (विद्रोह) | सूची-II (नेतृत्वकर्ता) | |
A. पाइका विद्रोह | 1. | एडाचना कुंगन |
B. बरेली विद्रोह | 2. | राधाराम |
C. मालाबार विद्रोह | 3. | मुफ़्ती मोहम्मद ऐवाज़ |
D. सिलहट विद्रोह | 4. | जगबंधु विद्याधर महापात्र |
कूट :
A-4, B-3, C-1, D-2
A-3, B-4, C-1, D-2
A-3, B-2, C-1, D-4
A-2, B-1, C-3, D-4
Correct Answer: A
Detailed Solution
सही सुमेलन है — पाइका विद्रोह–जगबंधु विद्याधर महापात्र, बरेली विद्रोह–मुफ़्ती मोहम्मद ऐवाज़, मालाबार विद्रोह–एडाचना कुंगन और सिलहट विद्रोह–राधाराम।
पाइका विद्रोह का नेतृत्व बक्शी जगबंधु विद्याधर महापात्र ने किया था। यह विद्रोह 1817 में खुर्दा, ओडिशा में ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासन के विरुद्ध हुआ। जगबंधु खुर्दा के राजा के पारंपरिक सैन्य कमांडर थे और पाइकों के प्रमुख नेता बनकर उभरे।
ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों, पाइकों की कर-मुक्त भूमि के नुकसान तथा पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था में हस्तक्षेप ने असंतोष को बढ़ाया। मार्च-अप्रैल 1817 में विद्रोह तेजी से खुर्दा, बनपुर और आसपास के क्षेत्रों में फैल गया।
बरेली विद्रोह का नेतृत्व मुफ़्ती मोहम्मद ऐवाज़ ने किया था। यहाँ 1857 के बरेली विद्रोह की बात नहीं, बल्कि 1816 के बरेली नागरिक विद्रोह की बात है। इसका प्रमुख कारण स्थानीय पुलिस के रख-रखाव के लिए लगाया गया कर और उसकी कठोर वसूली थी।
मुफ़्ती मोहम्मद ऐवाज़ रोहिलखंड में अत्यंत सम्मानित धार्मिक व्यक्ति थे। पुलिस द्वारा कर-वसूली के दौरान हुई हिंसा और स्वयं मुफ़्ती के घायल होने से विरोध व्यापक विद्रोह में बदल गया तथा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इसमें शामिल हुए।
मालाबार विद्रोह का संबंध एडाचना कुंगन से है। इस प्रश्न में ‘मालाबार विद्रोह’ से आशय 1921 के मप्पिला विद्रोह से नहीं, बल्कि पझस्सी राजा के नेतृत्व में कम्पनी-विरोधी मालाबार प्रतिरोध से है। एडाचना कुंगन पझस्सी राजा के प्रमुख सैन्य सहयोगी और सेनानायक थे।
11 अक्टूबर 1802 को पनमरम किले पर हुए आक्रमण में एडाचना कुंगन ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने वायनाड में लोगों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हथियार उठाने के लिए संगठित किया।
सिलहट विद्रोह का संबंध राधाराम से था। राधाराम वर्तमान दक्षिणी करीमगंज क्षेत्र के स्थानीय जमींदार थे और ब्रिटिश सत्ता को स्वीकार न करने के कारण उनका कम्पनी से संघर्ष हुआ। 1786 में उनके प्रतिरोध के बाद ही अंग्रेज उस क्षेत्र में अपना नियंत्रण अधिक मजबूती से स्थापित कर सके।