JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2022

Previous Year Question

ज्योतिबा फुले सम्बन्धित थे

A.

सविनय अवज्ञा आन्दोलन से

B.

श्रमिक संघ आन्दोलन से

C.

जाति-विरोधी आन्दोलन से

D.

कृषक आन्दोलन से

Correct Answer: C

Detailed Solution

ज्योतिबा फुले मुख्य रूप से 19वीं शताब्दी के जाति-विरोधी सामाजिक सुधार आंदोलन से संबंधित थे।

ज्योतिराव गोविंदराव फुले ने भारतीय समाज में प्रचलित जातिगत भेदभाव, छुआछूत और जन्म के आधार पर सामाजिक श्रेष्ठता की व्यवस्था का विरोध किया। उन्होंने विशेष रूप से शूद्रों, अतिशूद्रों, महिलाओं और अन्य वंचित वर्गों की शिक्षा तथा सामाजिक समानता पर बल दिया।

उन्होंने 24 सितंबर 1873 को पुणे में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। ‘सत्यशोधक’ का अर्थ सत्य की खोज करने वाला है। इस संगठन का उद्देश्य जाति-आधारित सामाजिक असमानता को चुनौती देना और वंचित वर्गों को धार्मिक-सामाजिक शोषण से मुक्त करना था।

फुले ने धार्मिक तथा सामाजिक संस्कारों पर पुरोहित वर्ग के एकाधिकार का भी विरोध किया। सत्यशोधक समाज ने ऐसे विवाह और अन्य संस्कारों को प्रोत्साहित किया जिनमें ब्राह्मण पुरोहित की अनिवार्य भूमिका न हो।

महिला शिक्षा उनके सुधार कार्यक्रम का भी प्रमुख भाग थी। ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में बालिकाओं के लिए विद्यालय प्रारंभ किया और बाद में वंचित समुदायों की शिक्षा के विस्तार के लिए भी कार्य किया।

उनकी प्रसिद्ध कृति गुलामगिरी 1873 में प्रकाशित हुई। इसमें उन्होंने जाति-आधारित उत्पीड़न की आलोचना की और सामाजिक असमानता को दासता के समान माना।

फुले ने किसानों की समस्याओं पर भी लिखा था, इसलिए उनका कृषक प्रश्नों से संबंध अवश्य था; लेकिन प्रश्न में दिए गए आंदोलनों में उनकी सबसे स्पष्ट और प्रमुख ऐतिहासिक पहचान जाति-विरोधी आंदोलन से है।

वे 1890 में निधन हो चुके थे, जबकि सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में प्रारंभ हुआ। इसी प्रकार उनका प्रमुख कार्य आधुनिक Trade Union Movement के संगठन से संबंधित नहीं था।

इसलिए सही उत्तर (c) जाति-विरोधी आन्दोलन से है।

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