Previous Year Question
‘सत्यशोधक समाज’ के संस्थापक कौन थे जिनका प्राथमिक जोर सत्य की खोज पर था?
राजा राम मोहन राय
एम. जी. रानाडे
ज्योतिबा फुले
ताराबाई शिन्दे
Correct Answer: C
Detailed Solution
‘सत्यशोधक समाज’ के संस्थापक ज्योतिबा फुले थे।
ज्योतिराव गोविंदराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। ‘सत्यशोधक’ का अर्थ सत्य की खोज करने वाला है। संगठन का उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त जातिगत असमानता और शोषण को चुनौती देना था।
फुले ने विशेष रूप से शूद्रों और अतिशूद्रों की सामाजिक समानता, शिक्षा और अधिकारों पर बल दिया। उनका मानना था कि जाति के आधार पर जन्मजात श्रेष्ठता अथवा हीनता स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
सत्यशोधक समाज ने धार्मिक और सामाजिक मामलों में ब्राह्मण पुरोहितों के एकाधिकार का विरोध किया। संगठन ने ऐसे सरल सामाजिक और धार्मिक संस्कारों को बढ़ावा दिया जिनमें पुरोहित की अनिवार्य भूमिका न हो।
महिला शिक्षा भी फुले के सुधार कार्यक्रम का प्रमुख भाग थी। ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में बालिकाओं के लिए विद्यालय प्रारंभ किया। इसके बाद उन्होंने महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों की शिक्षा को आगे बढ़ाने का कार्य जारी रखा।
फुले ने बाल विवाह, विधवाओं की कठिन स्थिति और जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक समस्याओं की भी आलोचना की। उनके सामाजिक विचार केवल धार्मिक सुधार तक सीमित नहीं थे, बल्कि किसानों और निम्न सामाजिक वर्गों के शोषण से भी संबंधित थे।
उनकी प्रसिद्ध कृति गुलामगिरी (Gulamgiri), 1873 में जाति-आधारित उत्पीड़न की तीखी आलोचना की गई। बाद में शेतकऱ्याचा आसूड में उन्होंने किसानों की समस्याओं और उनके आर्थिक शोषण को भी उठाया।
एम. जी. रानाडे मुख्यतः प्रार्थना समाज और अन्य सामाजिक-सुधार गतिविधियों से जुड़े थे। राजा राम मोहन राय ब्रह्म समाज से संबंधित थे, जबकि ताराबाई शिन्दे सत्यशोधक विचारधारा से प्रभावित प्रमुख महिला लेखिका थीं, लेकिन सत्यशोधक समाज की संस्थापक नहीं थीं।