Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
सूची-I (व्यक्ति) | सूची-II (सम्बन्धित कार्य/पद) | |
A. डी. के. कर्वे | 1. | कलकत्ता में कन्या विद्यालय की स्थापना |
B. जे. ई. डी. बेथ्यून | 2. | सचिव, विधवा री-मैरिज एसोसिएशन |
C. ईश्वर चन्द्र विद्यासागर | 3. | बाल विवाह विरुद्ध संघर्ष प्रारम्भ करना |
D. बी. एम. मालाबारी | 4. | कलकत्ता में संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य |
कूट :
A-1, B-2, C-3, D-4
A-2, B-1, C-4, D-3
A-2, B-1, C-3, D-4
A-1, B-2, C-4, D-3
Correct Answer: B
Detailed Solution
सही सुमेलन है — डी. के. कर्वे–विधवा री-मैरिज एसोसिएशन के सचिव, जे. ई. डी. बेथ्यून–कलकत्ता में कन्या विद्यालय की स्थापना, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर–संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य और बी. एम. मालाबारी–बाल विवाह के विरुद्ध संघर्ष।
डी. के. कर्वे का संबंध विधवा पुनर्विवाह आंदोलन से था। धोंडो केशव कर्वे ने स्वयं 1893 में एक विधवा से विवाह किया और विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में सक्रिय अभियान चलाया। वे Widow Remarriage Association से जुड़े और उसके सचिव बने।
कर्वे ने केवल विधवा पुनर्विवाह तक अपने कार्य को सीमित नहीं रखा। उन्होंने विधवाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए संस्थाएँ स्थापित कीं तथा आगे चलकर महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1916 में स्थापित महिला विश्वविद्यालय, जो बाद में SNDT Women's University के रूप में विकसित हुआ, उनके प्रयासों का महत्त्वपूर्ण परिणाम था।
जे. ई. डी. बेथ्यून का संबंध कलकत्ता में कन्या विद्यालय की स्थापना से था। उन्होंने 1849 में Calcutta Female School की स्थापना की, जिसमें प्रारंभ में 21 छात्राएँ थीं। बाद में यही संस्था Bethune School के नाम से प्रसिद्ध हुई और महिला शिक्षा के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।
ईश्वर चन्द्र विद्यासागर का संबंध संस्कृत कॉलेज, कलकत्ता से था। वे 1851 में Sanskrit College के प्रथम भारतीय Principal बने। उन्होंने कॉलेज की शिक्षा-व्यवस्था में सुधार किए और संस्कृत शिक्षा को अधिक आधुनिक तथा व्यापक बनाने का प्रयास किया।
विद्यासागर का सामाजिक सुधार में भी बड़ा योगदान था। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में व्यापक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप Hindu Widows' Remarriage Act, 1856 पारित होने की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
बी. एम. मालाबारी ने बाल विवाह के विरुद्ध प्रमुख अभियान चलाया। उन्होंने 1884 में Notes on Infant Marriage and Enforced Widowhood के माध्यम से बाल विवाह और जबरन वैधव्य की समस्याओं को सार्वजनिक तथा सरकारी बहस का विषय बनाया।
मालाबारी के अभियान ने विवाह और सहमति की न्यूनतम आयु से संबंधित सुधारों की माँग को मजबूत किया। उनके प्रयास 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में बाल विवाह के विरुद्ध चल रहे सामाजिक सुधार आंदोलन का महत्त्वपूर्ण भाग थे।