Previous Year Question
निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिये तथा उनको कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिये।
I. गदर पार्टी की स्थापना
II. चिटगाँव शस्त्रागार छापा
III. बर्लिन में ‘इंडियन इंडिपेंडेंस कमेटी’ की स्थापना
IV. केन्द्रीय एसेम्बली बम काण्ड
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिये :
कूट :
III, I, II तथा IV
I, III, IV तथा II
I, III, II तथा IV
III, I, IV तथा II
Correct Answer: B
Detailed Solution
सही कालानुक्रमिक क्रम गदर पार्टी की स्थापना → बर्लिन में इंडियन इंडिपेंडेंस कमेटी → केन्द्रीय एसेम्बली बम काण्ड → चिटगाँव शस्त्रागार छापा है।
इनमें सबसे पहले गदर पार्टी की स्थापना 1913 ई. में उत्तरी अमेरिका में हुई। इसके प्रमुख संस्थापकों में सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल, कांशीराम और अन्य प्रवासी भारतीय क्रांतिकारी शामिल थे। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति द्वारा भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करना था।
गदर आंदोलन का प्रमुख केंद्र बाद में San Francisco का Yugantar Ashram बना और वहीं से Ghadar नामक क्रांतिकारी पत्र भी प्रकाशित किया गया। प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने पर गदरियों ने विदेशों में बसे भारतीयों और भारतीय सैनिकों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह के लिए संगठित करने का प्रयास किया।
इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी में क्रांतिकारियों ने Berlin Committee का गठन किया। यह संगठन आगे Indian Independence Committee के नाम से जाना गया। इसमें वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय, भूपेंद्रनाथ दत्त, लाला हरदयाल और अन्य भारतीय क्रांतिकारी जुड़े थे। इसका उद्देश्य जर्मन सहायता से भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह को सहायता पहुँचाना था।
तीसरी घटना केन्द्रीय एसेम्बली बम काण्ड, 8 अप्रैल 1929 थी। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की Central Legislative Assembly में बम फेंके। उनका उद्देश्य भारी जनहानि करना नहीं, बल्कि Public Safety Bill और Trade Disputes Bill जैसी औपनिवेशिक नीतियों के विरोध को प्रभावशाली ढंग से सामने लाना था।
बम फेंकने के बाद दोनों क्रांतिकारी घटनास्थल से भागे नहीं। उन्होंने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाए, पर्चे बाँटे और गिरफ्तारी दी, ताकि मुकदमे को अपने राजनीतिक विचारों के प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग किया जा सके।
सबसे बाद में चिटगाँव शस्त्रागार छापा 18 अप्रैल 1930 को हुआ। इसका नेतृत्व सूर्य सेन, जिन्हें ‘मास्टरदा’ कहा जाता था, ने किया। क्रांतिकारियों की योजना चिटगाँव में पुलिस और Auxiliary Forces के शस्त्रागारों पर अधिकार करने तथा संचार व्यवस्था को बाधित करने की थी।
छापे के बाद क्रांतिकारियों ने चिटगाँव में ब्रिटिश प्रशासन को अस्थायी रूप से चुनौती दी और बाद में जलालाबाद पहाड़ियों में ब्रिटिश सैनिकों के साथ सशस्त्र संघर्ष हुआ।