Previous Year Question
नीचे दो कथन दिये गये हैं, जिनमें एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है :
कथन (A) : ब्रिटिश सरकार ने भारत के अलग-अलग भागों में भू-राजस्व की अलग-अलग व्यवस्था लागू की थी।
कारण (R) : इससे भारतीय किसानों में अलग-अलग वर्ग बन गये।
नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर चुनिए :
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(A) सही है परन्तु (R) गलत है
(A) गलत है परन्तु (R) सही है
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन (A) सही है। ब्रिटिश शासन ने पूरे भारत में एक समान भू-राजस्व व्यवस्था लागू नहीं की। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रमुख रूप से Permanent Settlement या Zamindari System, Ryotwari System और Mahalwari System लागू किए गए।
Permanent Settlement 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस के शासनकाल में मुख्य रूप से बंगाल क्षेत्र में लागू किया गया। इसमें जमींदारों को भूमि-राजस्व सरकार को जमा करने की जिम्मेदारी दी गई और उन्हें भूमि पर मजबूत proprietary rights प्राप्त हुए। इसके परिणामस्वरूप कृषक बड़ी संख्या में जमींदारों के अधीन tenants की स्थिति में आ गए।
इसके विपरीत Ryotwari System में सरकार का भू-राजस्व संबंध सीधे व्यक्तिगत कृषक अर्थात ryot से स्थापित किया गया। यह व्यवस्था मुख्य रूप से दक्षिण भारत के क्षेत्रों में विकसित हुई और Thomas Munro से विशेष रूप से जुड़ी थी। इसमें खेतों का सर्वेक्षण और प्रत्येक cultivator पर अलग revenue assessment किया जाता था।
Mahalwari System में राजस्व निर्धारण का आधार mahal, अर्थात एक गाँव अथवा गाँवों का समूह था। राजस्व की सामूहिक जिम्मेदारी गाँव या उसके प्रतिनिधियों पर रखी जाती थी। इस प्रकार तीनों व्यवस्थाओं में राज्य, जमींदार, गाँव और वास्तविक कृषक के बीच संबंध अलग-अलग थे।
कारण (R) भी सही है। इन विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं के कारण ग्रामीण समाज में अलग-अलग प्रकार के भूमि-अधिकार और कृषक वर्ग विकसित हुए—जैसे zamindars, intermediaries, tenants, pattadari ryots, sharecroppers और landless labourers। Permanent Settlement ने शक्तिशाली landlord class को बढ़ावा दिया, जबकि अन्य क्षेत्रों में cultivators और village bodies की अलग कानूनी तथा राजस्व स्थिति बनी।
इन व्यवस्थाओं ने भूमि को खरीद-बिक्री और गिरवी से जुड़ी संपत्ति में भी बदला। ऊँचे राजस्व और ऋणग्रस्तता के कारण कई किसानों की भूमि moneylenders और अन्य non-cultivating groups के हाथों में चली गई, जिससे ग्रामीण वर्ग-विभाजन और अधिक गहरा हुआ।
इसलिए प्रश्न के अनुसार अलग-अलग भू-राजस्व व्यवस्थाओं और भारतीय कृषक समाज में अलग-अलग वर्गों के विकास के बीच सीधा संबंध माना गया है।