JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2017

Previous Year Question

निम्नलिखित समाज सुधारकों में से किसने 1826 के जूरी अधिनियम का घोर विरोध किया?

A.

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर

B.

राजा राम मोहन राय

C.

महादेव गोविंद रानाडे

D.

राजनारायण बसु

Correct Answer: B

Detailed Solution

1826 के जूरी अधिनियम का घोर विरोध राजा राम मोहन राय ने किया था।

राजा राम मोहन राय केवल धार्मिक और सामाजिक सुधारों तक सीमित नहीं थे। उन्होंने नागरिक अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता और न्यायिक समानता से संबंधित औपनिवेशिक नीतियों के विरुद्ध भी सक्रिय रूप से आवाज उठाई।

इस प्रश्न में इसे Jury Act of 1826 कहा गया है। ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि नया Jury Act 1827 के प्रारंभ में लागू हुआ, इसलिए कई संस्थागत विवरण इसे Jury Act of 1827 भी कहते हैं। दोनों उल्लेख उसी विवादित jury व्यवस्था से संबंधित हैं।

इस कानून में न्यायिक व्यवस्था के भीतर धर्म के आधार पर भेदभाव की समस्या थी। हिंदू और मुस्लिम भारतीय ईसाइयों के मुकदमों में समान jury अधिकार नहीं रखते थे, जबकि भारतीयों पर ईसाई jurors द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता था। राम मोहन राय ने इसे न्याय और समानता के सिद्धांत के विरुद्ध माना।

उन्होंने इस व्यवस्था के विरोध में ब्रिटिश संसद के दोनों सदनों के लिए petitions तैयार कराने और भेजने में सक्रिय भूमिका निभाई। इन petitions पर हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के हस्ताक्षर थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विरोध केवल किसी एक धार्मिक समुदाय की शिकायत नहीं था, बल्कि न्यायिक समानता का व्यापक प्रश्न था।

राम मोहन राय की इस भूमिका को उनके व्यापक civil liberties दृष्टिकोण से समझा जा सकता है। इससे पहले उन्होंने 1823 के Press Ordinance का भी विरोध किया था और प्रतिबंधात्मक प्रेस कानून के विरोध में अपने फारसी समाचार-पत्र Mirat-ul-Akhbar का प्रकाशन बंद कर दिया था।

उनकी दृष्टि में आधुनिक शासन में कानून सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और न्यायिक अधिकार धर्म के आधार पर अलग नहीं किए जाने चाहिए। इसी कारण Jury Act का विरोध उनके सामाजिक सुधार से आगे बढ़कर राजनीतिक और नागरिक अधिकारों संबंधी चिंतन को भी दर्शाता है।

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर मुख्यतः विधवा पुनर्विवाह और शिक्षा सुधार से, महादेव गोविंद रानाडे सामाजिक-धार्मिक तथा आर्थिक सुधारों से और राजनारायण बसु बंगाल के सामाजिक-बौद्धिक आंदोलनों से जुड़े थे। इस विशेष Jury Act के संगठित विरोध से संबंधित प्रमुख नाम राजा राम मोहन राय है।

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