Previous Year Question
चंपारण में “तीनकठिया प्रणाली” का क्या अर्थ था?
भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती
भूमि के 3/19 भाग पर नील की खेती
भूमि के 3/18 भाग पर नील की खेती
उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: A
Detailed Solution
तीनकठिया प्रणाली के अंतर्गत चंपारण के किसानों को अपनी भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करनी पड़ती थी।
बिहार में प्रचलित इस व्यवस्था के अंतर्गत एक बीघा भूमि के 20 कठ्ठों में से 3 कठ्ठे नील की खेती के लिए निर्धारित किए जाते थे। इसलिए इसे तीनकठिया या Tinkathia System कहा जाता था। दूसरे शब्दों में किसान को अपनी जोत के 3/20 भाग पर नील उगाना पड़ता था।
यह व्यवस्था यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा चंपारण के किसानों पर लागू की गई थी। किसान सामान्यतः अपनी भूमि के इस हिस्से पर अपनी इच्छा की खाद्य फसल के बजाय नील की खेती करने के लिए बाध्य थे और इसके बदले उन्हें अपेक्षाकृत कम प्रतिफल मिलता था।
1917 में महात्मा गांधी चंपारण पहुँचे और किसानों की शिकायतों की जाँच की। राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी का ध्यान चंपारण के नील किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गांधीजी ने बड़ी संख्या में किसानों के बयान एकत्र कर उनकी परिस्थितियों का अध्ययन किया।
बाद में सरकार ने Champaran Agrarian Committee का गठन किया, जिसमें गांधीजी को भी सदस्य बनाया गया। समिति ने किसानों और नील बागान मालिकों के बीच संबंधों तथा तीनकठिया व्यवस्था की जाँच की।
समिति की प्रमुख सिफारिशों में तीनकठिया प्रणाली का पूर्ण उन्मूलन शामिल था। सरकार ने इसकी सिफारिशों को स्वीकार किया और आगे चलकर Champaran Agrarian Act, 1918 के माध्यम से इस बाध्यकारी नील व्यवस्था का अंत हुआ।