Previous Year Question
स्थानीय स्वशासन की संस्था को किसके वायसराय काल में प्रोत्साहन मिला?
लॉर्ड मेयो
लॉर्ड रिपन
लॉर्ड डफरिन
लॉर्ड कर्जन
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारत में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को सबसे महत्त्वपूर्ण प्रोत्साहन लॉर्ड रिपन के वायसराय काल में मिला।
ब्रिटिश शासन के दौरान स्थानीय प्रशासन के विकास की प्रक्रिया लॉर्ड रिपन से पहले शुरू हो चुकी थी। लॉर्ड मेयो ने 1870 में वित्तीय विकेंद्रीकरण की दिशा में कदम उठाए और स्थानीय निकायों को कुछ प्रशासनिक तथा वित्तीय जिम्मेदारियाँ देने का प्रयास किया।
लेकिन स्थानीय स्वशासन को व्यवस्थित और अधिक प्रतिनिधिक स्वरूप देने का प्रमुख कदम लॉर्ड रिपन के 1882 के स्थानीय स्वशासन संबंधी प्रस्ताव से जुड़ा था। 18 मई 1882 का उनका Resolution भारत में स्थानीय स्वशासन के विकास का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
रिपन की व्यवस्था में स्थानीय निकायों में निर्वाचित गैर-सरकारी सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने, स्थानीय मामलों के प्रबंधन में भारतीयों को अधिक भूमिका देने तथा जहाँ संभव हो वहाँ गैर-सरकारी अध्यक्ष रखने पर बल दिया गया। इसका उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि लोगों को स्थानीय प्रशासन का व्यावहारिक अनुभव देना भी था।
इस नीति के अंतर्गत नगरपालिकाओं के साथ-साथ जिला और स्थानीय बोर्डों को भी विकसित करने का प्रयास किया गया। स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों तथा स्थानीय कार्यों से संबंधित अधिक जिम्मेदारियाँ देने की दिशा में भी कदम उठाए गए।
इसी योगदान के कारण लॉर्ड रिपन को सामान्यतः भारत में “स्थानीय स्वशासन का जनक” कहा जाता है। सरकारी स्रोत भी 1882 के उनके Resolution को भारत में स्थानीय स्वशासन के विकास की निर्णायक घटना के रूप में बताते हैं।
इसलिए प्रश्न में प्रयुक्त “got a fillip” का सबसे उपयुक्त संबंध लॉर्ड रिपन के काल से है, यद्यपि स्थानीय प्रशासन की दिशा में कुछ प्रारंभिक कदम उनसे पहले भी उठाए जा चुके थे।