Previous Year Question
नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A) : सल्तनत के क्षेत्रों को मोटे तौर पर दो भागों में विभाजित किया जा सकता है — खालसा और जागीरें।
कारण (R) : जागीरों में राज्य के नियंत्रण में आने वाली भूमि शामिल थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(A) गलत है, किन्तु (R) सही है।
(A) सही है, किन्तु (R) गलत है।
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: C
Detailed Solution
सल्तनत की राजस्व व्यवस्था को व्यापक रूप से समझने के लिए भूमि को खालसा तथा अधिकारियों को राजस्व-अधिकार के रूप में सौंपी गई भूमि में अलग किया जाता था। प्रश्न में इस दूसरी श्रेणी के लिए जागीर शब्द का प्रयोग किया गया है।
खालसा भूमि सीधे सुल्तान अथवा केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में रहती थी। इन क्षेत्रों से प्राप्त भू-राजस्व सीधे शाही खजाने में जमा होता था और इसका उपयोग केंद्रीय प्रशासन तथा शाही व्यय के लिए किया जाता था।
इसके विपरीत, दूसरी श्रेणी की भूमि अधिकारियों अथवा सैन्य-अमीरों को राजस्व प्राप्त करने के अधिकार के रूप में सौंपी जाती थी। दिल्ली सल्तनत के संदर्भ में इसके लिए अधिक सटीक प्रशासनिक शब्द इक्ता था और उसके धारक को मुक्ती अथवा इक्तादार कहा जाता था।
इक्तादार को भूमि का पूर्ण निजी स्वामित्व नहीं दिया जाता था। उसे निर्धारित क्षेत्र से राजस्व वसूलने तथा अपने प्रशासनिक और सैनिक दायित्वों को पूरा करने का अधिकार दिया जाता था। केंद्रीय सत्ता आवश्यकता पड़ने पर ऐसे assignment को बदल या स्थानांतरित भी कर सकती थी।
इसलिए राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आने वाली भूमि खालसा थी, जागीर अथवा इक्ता नहीं। कारण (R) ने दोनों श्रेणियों की विशेषता उलट दी है।
अधिक विस्तृत प्रशासनिक वर्गीकरण में इनाम, मदद-ए-माश या वक्फ जैसी अन्य प्रकार की भूमि-अनुदान श्रेणियाँ भी मिलती हैं। लेकिन इस प्रश्न में सल्तनत की राजस्व भूमि का व्यापक द्विभाजन पूछा गया है।
अतः अभिकथन में दिया गया खालसा और assigned land का व्यापक विभाजन स्वीकार्य है, लेकिन जागीरों को सीधे राज्य-नियंत्रित भूमि बताना गलत है।