Previous Year Question
बैरम खाँ के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
अकबर ने बैरम खाँ को खान-ए-खाना की उपाधि दी।
यह उपाधि साम्राज्य के वज़ीर के रूप में बैरम खाँ की नियुक्ति के समय नहीं दी गई।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1 और 2 दोनों
न तो 1 न ही 2
केवल 1
केवल 2
Correct Answer: C
Detailed Solution
हुमायूँ की मृत्यु के समय अकबर की आयु लगभग 13 वर्ष थी। उस समय बैरम खाँ अकबर का संरक्षक और अत्यंत विश्वसनीय मुगल सेनापति था।
हुमायूँ की मृत्यु के बाद 14 फरवरी 1556 ई. को पंजाब के कलानौर में अकबर का राज्याभिषेक हुआ। अकबर के अल्पवयस्क होने के कारण शासन के प्रारंभिक वर्षों में बैरम खाँ ने उसके Regent के रूप में शासन-व्यवस्था संभाली।
कथन 1 सही है। अकबर के प्रारंभिक शासनकाल में बैरम खाँ को खान-ए-खाना (Khan-i-Khanan) की उपाधि प्राप्त हुई और वह साम्राज्य का वकील (Wakil) बना। इस पद के कारण केंद्रीय प्रशासन और सैन्य मामलों पर उसका अत्यधिक प्रभाव था।
बैरम खाँ की सबसे महत्त्वपूर्ण सैन्य उपलब्धियों में 1556 ई. का पानीपत का द्वितीय युद्ध था। इसमें मुगल सेना ने हेमू को पराजित किया, जिससे उत्तर भारत में अकबर की सत्ता को स्थिर करने में सहायता मिली।
कथन 2 गलत है। उपलब्ध विवरण में बैरम खाँ का साम्राज्य का वकील बनना और खान-ए-खाना की उपाधि प्राप्त करना एक ही नियुक्ति-व्यवस्था से जुड़ा हुआ मिलता है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि यह उपाधि उसकी नियुक्ति के समय नहीं दी गई थी।
यहाँ ‘वज़ीर’ शब्द के स्थान पर ऐतिहासिक प्रशासनिक पद के लिए वकील अधिक सटीक शब्द है। बैरम खाँ ने 1556 से 1560 ई. तक अकबर के Regent और प्रमुख सत्ता-संचालक के रूप में कार्य किया।
1560 ई. में अकबर ने स्वयं शासन की बागडोर अपने हाथ में लेने का निर्णय किया और बैरम खाँ को उसके पद से हटा दिया। बाद में बैरम खाँ मक्का की यात्रा के लिए निकला, लेकिन गुजरात में उसकी हत्या कर दी गई।