Previous Year Question
शेरशाह को अपनी वीरता से प्रभावित करने वाले जैता और कुम्पा किस स्थान से सम्बन्धित थे ?
मेवाड़
मालवा
मारवाड़
बुन्देलखण्ड
Correct Answer: C
Detailed Solution
जैता और कुम्पा मारवाड़ के राठौड़ शासक राव मालदेव के वीर सेनानायक थे। उनका नाम विशेष रूप से शेरशाह सूरी और राव मालदेव के बीच हुए गिरि-सुमेल अथवा सम्मेल के युद्ध से जुड़ा हुआ है।
16वीं शताब्दी के मध्य में राव मालदेव राठौड़ ने मारवाड़ की शक्ति का काफी विस्तार कर लिया था। उसकी बढ़ती शक्ति के कारण शेरशाह सूरी ने मारवाड़ के विरुद्ध सैन्य अभियान किया।
दोनों सेनाएँ वर्तमान राजस्थान में जैतारण के निकट गिरि और सुमेल क्षेत्र में आमने-सामने आईं। निर्णायक संघर्ष 1544 ई. में हुआ।
युद्ध से पहले शेरशाह ने ऐसी रणनीति अपनाई जिससे राव मालदेव को अपने कुछ प्रमुख सरदारों की निष्ठा पर संदेह हो गया। इसके परिणामस्वरूप मालदेव मुख्य सेना के एक हिस्से के साथ युद्धक्षेत्र से पीछे हट गया।
इसके बावजूद जैता और कुम्पा ने अपने सैनिकों के साथ युद्ध जारी रखने का निर्णय लिया। उन्होंने संख्या में कहीं अधिक बड़ी अफगान सेना के विरुद्ध अत्यंत कठोर प्रतिरोध किया।
युद्ध में जैता और कुम्पा दोनों वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनके प्रतिरोध ने शेरशाह को अत्यधिक प्रभावित किया। इस संघर्ष में शेरशाह को विजय तो मिली, पर उसकी सेना को भी भारी क्षति उठानी पड़ी।
इसी युद्ध से शेरशाह का वह प्रसिद्ध कथन जुड़ा है जिसमें उसने स्वीकार किया कि मारवाड़ के थोड़े-से बाजरे के लिए वह लगभग हिन्दुस्तान की बादशाहत खो बैठता।
इसलिए जैता और कुम्पा का संबंध मेवाड़, मालवा या बुन्देलखण्ड से नहीं, बल्कि मारवाड़ से था।