JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2022

Previous Year Question

निम्नलिखित में से किसने चिन्तामणि भट्ट द्वारा रचित संस्कृत ग्रन्थ ‘शुक सप्तति’ का फारसी में अनुवाद कर उसका नाम ‘तुतिनामा’ रखा ?

A.

अमीर खुसरो

B.

अब्दुर रज्जाक

C.

शिहाबुद्दीन-अल-उमरि

D.

ख्वाज़ा ज़िया-उद्दीन नख्शबि

Correct Answer: D

Detailed Solution

शुक सप्तति (Suka Saptati) संस्कृत की प्रसिद्ध कथा-परंपरा है। इसके नाम का अर्थ लगभग ‘तोते की सत्तर कथाएँ’ है। इसकी कथा-रचना में एक तोता क्रमशः कथाएँ सुनाता है।

इस ग्रंथ के विभिन्न संस्कृत संस्करण प्रचलित रहे। इनमें एक विस्तृत recension का संबंध चिन्तामणि भट्ट से माना जाता है।

14वीं शताब्दी में ख्वाज़ा ज़िया-उद्दीन नख्शबि ने इस भारतीय कथा-परंपरा को फारसी में रूपांतरित किया। उसका फारसी रूप ‘तुतिनामा’ (Tutinama) अर्थात ‘तोते की पुस्तक/कथाएँ’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

नख्शबि केवल शाब्दिक अनुवाद तक सीमित नहीं रहा। उसने उपलब्ध कथा-सामग्री को फारसी साहित्यिक परंपरा के अनुरूप पुनर्गठित और रूपांतरित भी किया। इसलिए तुतिनामा को कई अध्ययनों में translation के साथ adaptation अथवा recasting के रूप में भी समझाया जाता है।

इस कथा का मूल ढाँचा एक ऐसी स्त्री के इर्द-गिर्द है जिसका पति बाहर गया हुआ है। उसका तोता प्रत्येक रात उसे एक नई कथा सुनाकर घर से बाहर जाने से रोकता है। इस प्रकार अनेक स्वतंत्र कथाएँ एक frame narrative के भीतर जुड़ती हैं।

आगे चलकर तुतिनामा मुगलकालीन चित्रकला के लिए भी महत्त्वपूर्ण बना। अकबर के प्रारंभिक शासनकाल में तुतिनामा की कथाओं पर आधारित एक प्रसिद्ध illustrated manuscript तैयार की गई।

अमीर खुसरो दिल्ली सल्तनत काल के महान फारसी कवि और साहित्यकार थे, लेकिन तुतिनामा का यह रूपांतरण उनका नहीं था। अब्दुर रज्जाक और शिहाबुद्दीन-अल-उमरी भी इस संस्कृत ग्रंथ के फारसी रूपांतरण के लेखक नहीं थे।

अतः चिन्तामणि भट्ट की शुक सप्तति का फारसी रूप तुतिनामा तैयार करने वाला विद्वान ख्वाज़ा ज़िया-उद्दीन नख्शबि था।

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