Previous Year Question
नीचे दो कथन दिए गए हैं जिनमें एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
कथन (A) : अकबर ने शेरशाह की तरह राज्य के सिक्कों के प्रचलन को नियमित करने का प्रयास किया।
कारण (R) : शेरशाह की मुद्रा पद्धति के समान अकबर के समय का ताम्र का प्रमुख सिक्का दाम था।
नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
(A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
Correct Answer: B
Detailed Solution
शेरशाह सूरी ने मुद्रा व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण सुधार किए। उसने चाँदी के सिक्के रुपया को मानकीकृत किया और सोने, चाँदी तथा ताँबे के सिक्कों पर आधारित अधिक व्यवस्थित मुद्रा व्यवस्था विकसित की।
अकबर ने शेरशाह द्वारा स्थापित मुद्रा व्यवस्था के आधार को आगे बढ़ाया और इसे अधिक व्यापक तथा संगठित रूप दिया। मुगल मुद्रा व्यवस्था में सोने की मोहर, चाँदी का रुपया और ताँबे का दाम प्रमुख सिक्के थे। इसलिए अकबर द्वारा राज्य की मुद्रा को नियमित करने संबंधी कथन (A) सही है।
कारण (R) भी सही है। अकबर के समय दैनिक छोटे लेन-देन के लिए दाम प्रमुख ताम्र सिक्का था। इसका भार लगभग 323 grains था और अकबर के शासन के उत्तरार्द्ध में लेखांकन के लिए सामान्यतः 40 दाम = 1 रुपया माना जाता था।
अकबर की मुद्रा व्यवस्था ने शेरशाह की व्यवस्था में विकसित मानकीकरण की परंपरा को जारी रखा। इस प्रकार दोनों शासकों की मुद्रा व्यवस्थाओं में स्पष्ट निरंतरता दिखाई देती है।
लेकिन अकबर के समय दाम का प्रमुख ताम्र सिक्का होना यह नहीं बताता कि अकबर ने मुद्रा व्यवस्था को नियमित क्यों किया। यह उसकी मुद्रा व्यवस्था की एक विशेषता है, मुद्रा-नियमन का कारण नहीं।