JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2016

Previous Year Question

मुगल काल में जिस मदरसे ने ‘मुस्लिम न्यायशास्त्र’ की पढ़ाई में विशिष्टता हासिल की थी, वह कहाँ स्थित था?

A.

लखनऊ

B.

दिल्ली

C.

सियालकोट

D.

हैदराबाद (भारत)

Correct Answer: A

Detailed Solution

मुगल काल में लखनऊ इस्लामी शिक्षा और विशेष रूप से मुस्लिम विधि एवं न्यायशास्त्र का महत्वपूर्ण केन्द्र बनकर उभरा।

लखनऊ की इस विद्वत परंपरा में फिरंगी महल का विशेष स्थान था। यह आगे चलकर भारत के सबसे प्रभावशाली इस्लामी शिक्षण केन्द्रों में से एक बना।

इस विद्वत परिवार को मुगलकाल में संरक्षण मिला। 17वीं शताब्दी के अंत में परिवार के पूर्व निवास से विस्थापित होने के बाद उन्हें लखनऊ में भवन प्रदान किया गया और यहीं एक महत्वपूर्ण शिक्षण परंपरा विकसित हुई।

इस परंपरा के सबसे प्रसिद्ध विद्वानों में मुल्ला निजामुद्दीन सिहालवी थे। उनके नाम से जुड़ा पाठ्यक्रम दर्स-ए-निजामी कहलाया और बाद में भारतीय उपमहाद्वीप के अनेक मदरसों पर उसका प्रभाव पड़ा।

यहाँ फिक्ह अर्थात इस्लामी न्यायशास्त्र, उसूल-ए-फिक्ह अर्थात न्यायशास्त्र के सिद्धांत, कुरआन, हदीस, अरबी व्याकरण, तर्कशास्त्र और दर्शन जैसे विषय पढ़ाए जाते थे।

इस परंपरा से जुड़े अनेक विद्वानों ने फतवा, न्यायशास्त्र और न्यायिक प्रशासन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके विद्वान काज़ी और मुफ्ती जैसे न्यायिक पदों पर भी नियुक्त होते रहे।

हालाँकि दिल्ली और सियालकोट भी मुगलकालीन शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र थे, इस प्रश्न में Muslim Jurisprudence में विशिष्ट मदरसा-परंपरा के लिए लखनऊ को पूछा गया है।

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