Previous Year Question
निम्नलिखित में से किन लोगों ने मुगल सम्राट जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह किया था?
आसफ खाँ
खुर्रम
महाबत खाँ
खुसरौ
कूट:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 2 और 4
केवल 2, 3 और 4
Correct Answer: B
Detailed Solution
4. खुसरौ — विद्रोह किया:
जहाँगीर के शासन की शुरुआत के तुरंत बाद उसके ज्येष्ठ पुत्र राजकुमार खुसरौ ने 1606 ई. में विद्रोह किया।
खुसरौ आगरा से निकलकर पंजाब की ओर गया और अपने समर्थकों को संगठित किया। जहाँगीर की सेना ने उसका पीछा किया और अंततः उसे पराजित कर बंदी बना लिया।
इस विद्रोह का महत्व इसलिए भी था क्योंकि जहाँगीर के शासन के आरंभिक वर्षों में ही मुगल राजपरिवार के भीतर उत्तराधिकार और सत्ता का संघर्ष खुलकर सामने आ गया था।
2. खुर्रम — विद्रोह किया:
राजकुमार खुर्रम, जो बाद में सम्राट शाहजहाँ बना, ने भी अपने पिता जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह किया।
17वीं शताब्दी के तीसरे दशक में राजदरबार के भीतर उत्तराधिकार, नूरजहाँ गुट और राजनीतिक प्रभाव को लेकर संघर्ष बढ़ा। IGNCA की ऐतिहासिक सामग्री स्पष्ट रूप से कहती है कि जहाँगीर के शासनकाल में पहले खुसरौ और फिर खुर्रम ने विद्रोह किया।
खुर्रम का विद्रोह कई वर्षों तक चला। मुगल सेनाएँ उसके विरुद्ध भेजी गईं और अंततः उसे समझौता करके समर्पण करना पड़ा। बाद में जहाँगीर की मृत्यु के बाद वही शाहजहाँ के रूप में सिंहासन पर बैठा।
3. महाबत खाँ — विद्रोह किया:
महाबत खाँ जहाँगीर का शक्तिशाली सेनापति था। नूरजहाँ और आसफ खाँ के साथ उसके राजनीतिक मतभेद गंभीर हो गए थे।
1626 ई. में महाबत खाँ ने एक अत्यंत साहसी कदम उठाकर जहाँगीर को झेलम/बेहट नदी के निकट अपने नियंत्रण में ले लिया। उसने नदी पर बने पुल को नियंत्रित किया और सम्राट को उसके शिविर में ही प्रभावी रूप से बंदी बना लिया।
नूरजहाँ ने बाद में राजनीतिक और सैन्य चालों से स्थिति को बदल दिया और जहाँगीर को महाबत खाँ के नियंत्रण से मुक्त कराया। यह घटना इतिहास में सामान्यतः महाबत खाँ का विद्रोह कही जाती है।
1. आसफ खाँ — विद्रोह नहीं किया:
आसफ खाँ नूरजहाँ का भाई और मुमताज महल का पिता था। वह जहाँगीर के प्रमुख अमीरों और मंत्रियों में से था।
महाबत खाँ की कार्रवाई के समय आसफ खाँ सम्राट के विरोधी के रूप में नहीं बल्कि जहाँगीर और नूरजहाँ के पक्ष में था। महाबत खाँ द्वारा सम्राट को बंदी बनाए जाने के बाद नूरजहाँ और आसफ खाँ ने उसे छुड़ाने का प्रयास किया।
जहाँगीर की मृत्यु के बाद आसफ खाँ ने अपने दामाद खुर्रम अर्थात शाहजहाँ को सिंहासन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन इसे जहाँगीर के शासनकाल में उसके विरुद्ध विद्रोह नहीं माना जाता।