Previous Year Question
अकबर की इच्छा के अनुसार रामायण का फारसी में अनुवाद किसने किया था?
अबुल फज़ल
अब्दुल कादिर बदायूँनी
फैज़ी
अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना
Correct Answer: B
Detailed Solution
मुगल सम्राट अकबर ने संस्कृत के महत्वपूर्ण धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों को फारसी में अनुवाद कराने की एक व्यापक परियोजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य विभिन्न धार्मिक और बौद्धिक परंपराओं को फारसीभाषी मुगल अभिजात वर्ग के लिए उपलब्ध कराना था।
अकबर के दरबार में इस अनुवाद कार्य के लिए मकतब खाना अर्थात Translation Department विकसित किया गया। संस्कृत जानने वाले पंडित मूल ग्रंथ का अर्थ समझाते थे और फारसी विद्वान उसे फारसी रूप देते थे।
इसी परियोजना के अंतर्गत वाल्मीकि रामायण का फारसी अनुवाद अब्दुल कादिर बदायूँनी ने किया। IGNOU की Indo-Persian historiography संबंधी सामग्री स्पष्ट रूप से बताती है कि बदायूँनी ने रामायण का अनुवाद किया और यह परियोजना 1591 ई. में पूर्ण हुई।
अनुवाद की प्रक्रिया सीधे संस्कृत से अकेले बदायूँनी द्वारा नहीं की गई थी। उस समय की सामान्य दरबारी पद्धति के अनुसार संस्कृत विद्वान पहले पाठ का अर्थ तत्कालीन ‘हिन्दी’ में समझाते थे और उसके आधार पर फारसी अनुवाद तैयार किया जाता था। इसलिए यह एक सहयोगात्मक दरबारी प्रक्रिया थी, लेकिन प्रश्न में जिस फारसी अनुवादक का नाम पूछा गया है, वह बदायूँनी है।
बदायूँनी स्वयं एक महत्वपूर्ण इतिहासकार भी था। उसकी प्रसिद्ध कृति मुन्तखब-उत-तवारीख है। वह अकबर की कई धार्मिक नीतियों और प्रयोगों का आलोचक था, फिर भी उसे अकबर के अनुवाद कार्यक्रम में काम करना पड़ा।
अकबर ने केवल रामायण ही नहीं, बल्कि महाभारत, हरिवंश और अन्य संस्कृत ग्रंथों का भी फारसी में अनुवाद कराया। महाभारत के फारसी रूप को रज़्मनामा कहा गया।
यहाँ अन्य विकल्पों को अलग रखना उपयोगी है। अबुल फज़ल अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी का लेखक था; फैज़ी भी अकबर के दरबार का महत्वपूर्ण विद्वान और अनुवादक था; तथा अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना भी साहित्य और अनुवाद परंपरा से जुड़ा था। लेकिन अकबर के आदेश पर रामायण के इस फारसी अनुवाद से विशेष रूप से अब्दुल कादिर बदायूँनी जुड़ा है।