Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन आलवार संत नहीं था?
पोयगई
तिरुग्यान
पूदम
तिरुमंगई
Correct Answer: B
Detailed Solution
दक्षिण भारत के प्रारम्भिक भक्ति आंदोलन में दो प्रमुख संत-परंपराएँ थीं—आलवार और नयनार।
आलवार विष्णु-भक्त संत थे, जबकि नयनार शिव-भक्त संत थे। IGNOU की सामग्री के अनुसार कुल 12 आलवार माने जाते हैं और उनकी रचनाओं को बाद में नालायिर दिव्यप्रबंधम् में संकलित किया गया।
(a) पोयगई — आलवार संत:
पोयगई अथवा पोयगई आलवार बारह आलवार संतों में शामिल थे। उन्हें प्रारम्भिक तीन आलवारों में गिना जाता है।
ये प्रारम्भिक तीन संत सामान्यतः—
पोयगई आलवार
भूतत्त/पूदम आलवार
पेय आलवार
के रूप में जाने जाते हैं।
(c) पूदम — आलवार संत:
प्रश्न में दिया गया “Pudam” नाम भूतम्/भूतत्त आलवार के लिए प्रयुक्त रूप है। IGNOU की सूची में इन्हें Bhootayogi/Bhoottalvar के रूप में रखा गया है। अतः यह भी आलवार संत थे।
(d) तिरुमंगई — आलवार संत:
तिरुमंगई आलवार भी बारह प्रसिद्ध आलवार संतों में से एक थे। वे विष्णु भक्ति की तमिल परंपरा के महत्वपूर्ण कवि-संत थे और उनकी रचनाएँ दिव्यप्रबंधम् परंपरा का हिस्सा हैं।
(b) तिरुग्यान — आलवार नहीं:
प्रश्न के scan में नाम “Tirugyan” दिया गया है। इसका संदर्भ तिरुग्नान सम्बंदर/तिरुज्ञान सम्बंदर से है।
तिरुग्नान सम्बंदर आलवार नहीं, बल्कि प्रमुख शैव नयनार संत थे। वे अप्पर, सुन्दरर और माणिक्कवाचकर के साथ प्रमुख तमिल शैव संत-कवियों में गिने जाते हैं।
सम्बंदर द्वारा रचित स्तुतियाँ तेवारम् की प्रारम्भिक पुस्तकों का हिस्सा बनीं। इसलिए उनका धार्मिक संबंध शिव-भक्ति की नयनार परंपरा से था, विष्णु-भक्ति की आलवार परंपरा से नहीं।