JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2013

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन आलवार संत नहीं था?

A.

पोयगई

B.

तिरुग्यान

C.

पूदम

D.

तिरुमंगई

Correct Answer: B

Detailed Solution

दक्षिण भारत के प्रारम्भिक भक्ति आंदोलन में दो प्रमुख संत-परंपराएँ थीं—आलवार और नयनार।

आलवार विष्णु-भक्त संत थे, जबकि नयनार शिव-भक्त संत थे। IGNOU की सामग्री के अनुसार कुल 12 आलवार माने जाते हैं और उनकी रचनाओं को बाद में नालायिर दिव्यप्रबंधम् में संकलित किया गया।

(a) पोयगई — आलवार संत:
पोयगई अथवा पोयगई आलवार बारह आलवार संतों में शामिल थे। उन्हें प्रारम्भिक तीन आलवारों में गिना जाता है।

ये प्रारम्भिक तीन संत सामान्यतः—

पोयगई आलवार
भूतत्त/पूदम आलवार
पेय आलवार

के रूप में जाने जाते हैं।

(c) पूदम — आलवार संत:
प्रश्न में दिया गया “Pudam” नाम भूतम्/भूतत्त आलवार के लिए प्रयुक्त रूप है। IGNOU की सूची में इन्हें Bhootayogi/Bhoottalvar के रूप में रखा गया है। अतः यह भी आलवार संत थे।

(d) तिरुमंगई — आलवार संत:
तिरुमंगई आलवार भी बारह प्रसिद्ध आलवार संतों में से एक थे। वे विष्णु भक्ति की तमिल परंपरा के महत्वपूर्ण कवि-संत थे और उनकी रचनाएँ दिव्यप्रबंधम् परंपरा का हिस्सा हैं।

(b) तिरुग्यान — आलवार नहीं:
प्रश्न के scan में नाम “Tirugyan” दिया गया है। इसका संदर्भ तिरुग्नान सम्बंदर/तिरुज्ञान सम्बंदर से है।

तिरुग्नान सम्बंदर आलवार नहीं, बल्कि प्रमुख शैव नयनार संत थे। वे अप्पर, सुन्दरर और माणिक्कवाचकर के साथ प्रमुख तमिल शैव संत-कवियों में गिने जाते हैं।

सम्बंदर द्वारा रचित स्तुतियाँ तेवारम् की प्रारम्भिक पुस्तकों का हिस्सा बनीं। इसलिए उनका धार्मिक संबंध शिव-भक्ति की नयनार परंपरा से था, विष्णु-भक्ति की आलवार परंपरा से नहीं।

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