Previous Year Question
औरंगजेब की मृत्यु के समय मराठा नेतृत्व किसके हाथ में था?
संभाजी
राजाराम
जीजाबाई
ताराबाई
Correct Answer: D
Detailed Solution
औरंगजेब की मृत्यु 1707 ई. में हुई। उस समय मराठों के संघर्ष और शासन का वास्तविक नेतृत्व महारानी ताराबाई के हाथों में था।
क्रम को समझना महत्वपूर्ण है। शिवाजी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र संभाजी मराठा शासक बने। 1689 ई. में मुगलों ने संभाजी को पकड़कर मार दिया। इसके बाद शिवाजी के दूसरे पुत्र राजाराम ने मराठा नेतृत्व संभाला।
राजाराम ने औरंगजेब के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा, लेकिन मार्च 1700 ई. में सिंहगढ़ में उसकी मृत्यु हो गई। उस समय उसकी पत्नी ताराबाई लगभग 25 वर्ष की थीं।
राजाराम की मृत्यु के बाद ताराबाई ने अपने अल्पवयस्क पुत्र शिवाजी द्वितीय को उत्तराधिकारी घोषित किया और स्वयं संरक्षिका तथा वास्तविक शासक के रूप में मराठा शासन की बागडोर संभाली।
1700 से 1707 तक ताराबाई ने औरंगजेब के विरुद्ध मराठा प्रतिरोध का नेतृत्व किया। उन्होंने मराठा सरदारों को संगठित रखा, मुगल सेना पर लगातार दबाव बनाए रखा और मराठा सैन्य गतिविधियों को महाराष्ट्र से बाहर भी फैलाया।
भारत सरकार के Publications Division की सामग्री के अनुसार राजाराम की मृत्यु के बाद लगातार सात वर्षों तक ताराबाई ने महाराष्ट्र का शासन संभाला और औरंगजेब को कड़ी चुनौती दी।
इसलिए जब 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु हुई, तब संभाजी और राजाराम दोनों पहले ही मर चुके थे, जबकि जीजाबाई की मृत्यु बहुत पहले 1674 ई. में हो चुकी थी। उस समय मराठा नेतृत्व स्पष्ट रूप से ताराबाई के हाथ में था।
औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगलों ने शाहू को कैद से मुक्त किया। इसके बाद शाहू और ताराबाई के बीच मराठा नेतृत्व को लेकर संघर्ष शुरू हुआ, जिसने आगे चलकर मराठा राजनीति को दो प्रमुख धाराओं में बाँट दिया।