Previous Year Question
महाराजा जयसिंह द्वितीय ने कहाँ-कहाँ वेधशालाएँ बनवाई थीं?
दिल्ली
जयपुर
उज्जैन
वाराणसी
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए—
1 और 2
1 और 3
2 और 3
1, 2, 3 और 4
Correct Answer: D
Detailed Solution
सही उत्तर दिल्ली, जयपुर, उज्जैन और वाराणसी—चारों है।
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय को खगोल विज्ञान और गणित में विशेष रुचि थी। 18वीं शताब्दी के प्रथम भाग में उसने आकाशीय पिंडों की स्थिति, समय, ग्रहों की गति और खगोलीय गणनाओं को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से बड़े आकार की स्थायी खगोलीय वेधशालाएँ बनवाईं।
जयसिंह द्वितीय ने कुल पाँच प्रमुख वेधशालाएँ बनवाई थीं—
दिल्ली
जयपुर
मथुरा
वाराणसी/बनारस
उज्जैन
इनमें जयपुर का जंतर-मंतर सबसे विशाल और सर्वाधिक सुरक्षित अवस्था में संरक्षित है। UNESCO ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है। यहाँ लगभग 20 प्रमुख स्थायी खगोलीय यंत्र हैं, जिनका उपयोग नग्न आँखों से खगोलीय स्थितियों को मापने के लिए किया जाता था।
इन यंत्रों में सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र और राम यंत्र जैसे उपकरण विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इनके माध्यम से स्थानीय समय, सूर्य और तारों की स्थिति तथा अन्य खगोलीय माप लिए जाते थे।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रश्न में पाँचवीं वेधशाला मथुरा को विकल्पों में शामिल नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वहाँ वेधशाला नहीं थी; बल्कि दिए गए चारों स्थान स्वयं सही हैं, इसलिए सही कूट 1, 2, 3 और 4 है।