Previous Year Question
मामल्लपुरम में रथ स्मारकों के निर्माण के लिए निम्नलिखित में से कौन उत्तरदायी थे?
चोल
पल्लव
पाण्ड्य
चालुक्य
Correct Answer: B
Detailed Solution
तमिलनाडु के मामल्लपुरम अथवा महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ स्मारकों का निर्माण पल्लव शासकों के काल में हुआ था। यह नगर दक्षिण-पूर्वी भारत के कोरोमंडल तट पर पल्लवों का महत्वपूर्ण बंदरगाह और कला-स्थापत्य का केन्द्र था।
UNESCO के अनुसार महाबलीपुरम के स्मारक समूह की स्थापना पल्लव राजाओं ने की और यहाँ के शैल-कट तथा एकाश्म स्मारक मुख्यतः 7वीं–8वीं शताब्दी ई. में विकसित हुए।
इन स्मारकों में सबसे प्रसिद्ध रथ अथवा monolithic temples हैं। इन्हें रथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका आकार मंदिरों के उत्सवी रथों जैसा दिखाई देता है। वास्तव में ये चलने वाले रथ नहीं हैं, बल्कि एक ही विशाल चट्टान को ऊपर से नीचे काटकर बनाए गए एकाश्म मंदिर हैं।
मामल्लपुरम का विकास विशेष रूप से पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम, जिसकी उपाधि मामल्ल थी, से जुड़ा है। इसी उपाधि से नगर का नाम मामल्लपुरम प्रसिद्ध हुआ। उसके समय शैल-कट वास्तुकला में महत्वपूर्ण प्रयोग और विकास हुए।
प्रसिद्ध पंच रथ—धर्मराज रथ, भीम रथ, अर्जुन रथ, द्रौपदी रथ और नकुल-सहदेव रथ—इसी पल्लव स्थापत्य परंपरा के प्रमुख उदाहरण हैं। इन नामों का संबंध बाद की परंपरा से महाभारत के पात्रों के साथ जोड़ा गया है; इन स्मारकों का वास्तविक निर्माण पाण्डवों ने नहीं किया था।
इन रथों की स्थापत्य योजना एक जैसी नहीं है। इनमें विभिन्न प्रकार की छतों, विमानों, मंडपों और मंदिर-योजनाओं का प्रयोग दिखाई देता है। इस कारण इन्हें दक्षिण भारतीय द्रविड़ मंदिर स्थापत्य के विकास के प्रयोगात्मक मॉडल के रूप में भी देखा जाता है।
पल्लव स्थापत्य का विकास आगे चलकर शैल-कट और एकाश्म मंदिरों से संरचनात्मक मंदिरों की ओर हुआ। मामल्लपुरम का प्रसिद्ध Shore Temple इस बाद की संरचनात्मक परंपरा का प्रमुख उदाहरण है और इसे पल्लव राजा राजसिंह के काल से जोड़ा जाता है।