Previous Year Question
मराठा राजा शक्तिहीन हो गया तथा पेशवा वास्तविक शासक किसके समय से बन गया?
बालाजी विश्वनाथ
बाजीराव प्रथम
बालाजी राव
माधव राव प्रथम
Correct Answer: B
Detailed Solution
मराठा प्रशासन में प्रारम्भ में पेशवा राजा का मुख्य प्रधान अथवा प्रधानमंत्री था। शिवाजी के समय पेशवा अष्टप्रधान व्यवस्था का एक अधिकारी था और वास्तविक सर्वोच्च सत्ता छत्रपति के पास रहती थी। लेकिन 18वीं शताब्दी में परिस्थितियाँ बदलने लगीं और पेशवा पद धीरे-धीरे मराठा राजनीति का वास्तविक शक्ति-केंद्र बन गया।
इस परिवर्तन की नींव बालाजी विश्वनाथ के समय पड़ी। छत्रपति शाहू ने 1713 ई. में उसे पेशवा नियुक्त किया। उसने शाहू की स्थिति मजबूत की, विभिन्न मराठा सरदारों को उसके पक्ष में संगठित किया और पेशवा पद की राजनीतिक शक्ति को काफी बढ़ाया।
बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद उसका पुत्र बाजीराव प्रथम 1720 ई. में पेशवा बना। यहीं से पेशवा पद व्यवहारतः वंशानुगत बन गया। बाजीराव प्रथम ने लगभग बीस वर्षों तक मराठा सैन्य और राजनीतिक नीति का नेतृत्व किया।
छत्रपति शाहू ने शासन और युद्ध-संचालन से संबंधित अपने अधिकारों का बहुत बड़ा भाग पेशवा को सौंप दिया। परिणामस्वरूप पेशवा राज्य का de facto अर्थात वास्तविक शासक बनता गया। इसी संदर्भ में प्रश्न बाजीराव प्रथम के समय से मराठा राजा को शक्तिहीन और पेशवा को वास्तविक शासक मानता है।
बाजीराव प्रथम के समय मराठा प्रभाव दक्कन से निकलकर मालवा, बुन्देलखण्ड और उत्तर भारत तक तेजी से बढ़ा। निजाम के विरुद्ध उसकी सफल सैन्य नीति और उत्तर भारत में मराठा हस्तक्षेप ने पेशवा की स्थिति को और मजबूत किया।
हालाँकि यहाँ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सावधानी आवश्यक है। पेशवा की पूर्ण राजनीतिक प्रधानता एक क्रमिक प्रक्रिया थी। IGNOU के अनुसार बाजीराव प्रथम के 1720 में पेशवा बनने पर पद वंशानुगत हुआ, लेकिन बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) भी 1749 में शाहू की मृत्यु तक सतारा के राजा के नियंत्रण में था। शाहू की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव ने राजा को वास्तविक संप्रभु सत्ता से लगभग अलग कर दिया।
इसलिए अधिक सूक्ष्म रूप में—
बालाजी विश्वनाथ — पेशवा शक्ति के उत्थान की नींव
बाजीराव प्रथम — पेशवा का de facto राजनीतिक और सैन्य प्रभुत्व
बालाजी बाजीराव — 1749 के बाद छत्रपति की वास्तविक संप्रभु शक्ति का लगभग अंत