Previous Year Question
निम्नलिखित में से किस मध्यकालीन शासक के साथ यह कथन जोड़ा जाता है— “मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए साम्राज्य लगभग खो चुका था”?
अलाउद्दीन खिलजी
मुहम्मद तुगलक
शेरशाह
औरंगजेब
Correct Answer: C
Detailed Solution
यह प्रसिद्ध कथन शेरशाह सूरी से संबंधित है और इसका संदर्भ मारवाड़ के शासक राव मालदेव राठौड़ के विरुद्ध उसके अभियान से है।
शेरशाह ने हुमायूँ को पराजित करके 1540 ई. में उत्तर भारत में अपनी सत्ता स्थापित की। इसके बाद उसने अपने साम्राज्य को मजबूत करने के साथ मालवा और राजस्थान की ओर विस्तार किया। उस समय मारवाड़ का शासक राव मालदेव राठौड़ राजस्थान के सबसे शक्तिशाली राजपूत शासकों में से एक था।
1544 ई. में शेरशाह और मालदेव की सेनाएँ समेल अथवा सम्मेल के क्षेत्र में आमने-सामने हुईं। राजस्थान सरकार की ऐतिहासिक सामग्री में इस युद्ध को Battle of Samel कहा गया है और बताया गया है कि शेरशाह 1544 में मारवाड़ के विरुद्ध आगे बढ़ा था।
परंपरागत विवरण के अनुसार शेरशाह ने मालदेव के कुछ सरदारों के नाम से जाली पत्रों का प्रयोग करके उसके मन में अपने सेनापतियों के प्रति संदेह उत्पन्न किया। मालदेव ने अपनी मुख्य सेना के साथ पीछे हटने का निर्णय लिया।
फिर भी उसके कुछ प्रमुख राजपूत सरदारों और सैनिकों ने शेरशाह की विशाल सेना के विरुद्ध अत्यंत कठोर युद्ध किया। संघर्ष इतना कठिन था कि विजय प्राप्त करने के बावजूद शेरशाह राजपूतों की वीरता से बहुत प्रभावित हुआ।
इसी संदर्भ में शेरशाह से यह प्रसिद्ध कथन जोड़ा जाता है कि वह “मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिन्दुस्तान का साम्राज्य लगभग खो बैठा था।” यहाँ बाजरा मारवाड़ की अपेक्षाकृत शुष्क और कम उपजाऊ भूमि का प्रतीक था।
इस कथन का आशय यह था कि मारवाड़ जैसे शुष्क क्षेत्र को जीतने के लिए शेरशाह ने इतने कठिन युद्ध में अपने विशाल साम्राज्य को लगभग जोखिम में डाल दिया था।
युद्ध के बाद शेरशाह ने जोधपुर और अजमेर सहित मारवाड़ के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अधिकार स्थापित किया। लेकिन यह विजय आसानी से नहीं मिली थी और राजपूत प्रतिरोध ने उसे अत्यधिक प्रभावित किया।
इसलिए “मुट्ठी भर बाजरे” वाला प्रसिद्ध कथन शेरशाह सूरी से जुड़ा है।