Previous Year Question
चार बौद्ध संगीति निम्नलिखित स्थानों पर आयोजित की गई थीं। इन्हें सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए—
वैशाली
राजगृह
कुण्डलवन
पाटलिपुत्र
कूट:
1, 2, 4, 3
2, 1, 3, 4
2, 1, 4, 3
1, 2, 3, 4
Correct Answer: C
Detailed Solution
2. प्रथम बौद्ध संगीति — राजगृह: बौद्ध परंपरा के अनुसार प्रथम बौद्ध संगीति गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के शीघ्र बाद राजगृह में सप्तपर्णी गुफा में आयोजित हुई। यह मगध के राजा अजातशत्रु के समय हुई और इसकी अध्यक्षता महाकश्यप ने की।
इस संगीति का मुख्य उद्देश्य बुद्ध की शिक्षाओं को व्यवस्थित और सुरक्षित करना था। आनन्द ने बुद्ध के उपदेशों का पाठ किया, जिनसे सुत्त परंपरा जुड़ी, जबकि उपालि ने विनय संबंधी नियमों का पाठ किया। इस प्रकार बुद्ध की शिक्षाओं और संघ के अनुशासन को व्यवस्थित रूप दिया गया।
1. द्वितीय बौद्ध संगीति — वैशाली: दूसरी बौद्ध संगीति प्रथम संगीति के लगभग 100 वर्ष बाद वैशाली में आयोजित हुई। इसका मुख्य कारण संघ के अनुशासन से संबंधित कुछ आचारों पर विवाद था। वैशाली के कुछ भिक्षुओं द्वारा अपनाए गए दस व्यवहारों को विनय के विरुद्ध माना गया।
इस विवाद के परिणामस्वरूप बौद्ध संघ में गंभीर मतभेद उत्पन्न हुए। परंपरागत विवरण इसे आगे चलकर स्थविरवाद और महासांघिक धाराओं के विभाजन से भी जोड़ते हैं।
4. तृतीय बौद्ध संगीति — पाटलिपुत्र: तीसरी बौद्ध संगीति सम्राट अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की।
इस संगीति का उद्देश्य संघ में उत्पन्न मतभेदों और विभिन्न विचारों को व्यवस्थित करना था। बौद्ध परंपरा में इसे अभिधम्म पिटक के व्यवस्थित रूप तथा अशोक के संरक्षण में विभिन्न क्षेत्रों में बौद्ध धर्म-प्रचारकों को भेजे जाने से भी जोड़ा जाता है।
3. चतुर्थ बौद्ध संगीति — कुण्डलवन: परंपरागत उत्तर भारतीय विवरण के अनुसार चौथी बौद्ध संगीति कुषाण शासक कनिष्क के समय कश्मीर के कुण्डलवन में हुई। इसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष को भी इससे जोड़ा जाता है।
इस संगीति में बौद्ध सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा त्रिपिटकों पर व्याख्याएँ तैयार की गईं, जिन्हें सामूहिक रूप से विभाषा परंपरा से जोड़ा जाता है। यह संगीति विशेष रूप से सर्वास्तिवाद बौद्ध परंपरा के इतिहास में महत्वपूर्ण है।