Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए—
सूची-I (लेखक) | सूची-II (ग्रंथ) |
A. त्रिविक्रम भट्ट | 1. गीत गोविन्द |
B. सोमदेव | 2. बृहत्कथामंजरी |
C. जयदेव | 3. नलचम्पू |
D. क्षेमेन्द्र | 4. कथासरित्सागर |
कूट:
A-3, B-4, C-1, D-2
A-4, B-3, C-2, D-1
A-4, B-3, C-1, D-2
A-3, B-4, C-2, D-1
Correct Answer: A
Detailed Solution
A. त्रिविक्रम भट्ट — नलचम्पू (3): नलचम्पू संस्कृत के प्रारम्भिक और प्रसिद्ध चम्पू-काव्यों में से एक है। इसकी रचना त्रिविक्रम भट्ट ने की थी। चम्पू साहित्य की विशेषता यह है कि इसमें गद्य और पद्य दोनों का मिश्रित प्रयोग होता है। नलचम्पू में महाभारत की प्रसिद्ध नल और दमयन्ती की कथा को आधार बनाया गया है।
नलचम्पू को दमयन्तीकथा के नाम से भी जाना गया है। उपलब्ध ग्रंथ सात अध्यायों में है और संस्कृत चम्पू साहित्य के आरम्भिक विकसित उदाहरणों में इसकी गणना की जाती है।
B. सोमदेव — कथासरित्सागर (4): कथासरित्सागर की रचना 11वीं शताब्दी के कश्मीरी कवि सोमदेव ने संस्कृत में की थी। इसका अर्थ है—“कथाओं की नदियों का महासागर।”
सोमदेव ने अपनी रचना का आधार गुणाढ्य की अब अनुपलब्ध बृहत्कथा को बनाया। मूल बृहत्कथा पैशाची भाषा में मानी जाती है। कथासरित्सागर में मुख्य कथा नरवाहनदत्त की है, लेकिन उसके भीतर बड़ी संख्या में उपकथाएँ, लोककथाएँ और साहसिक कथाएँ समाहित हैं।
C. जयदेव — गीत गोविन्द (1): गीत गोविन्द 12वीं शताब्दी के कवि जयदेव की प्रसिद्ध संस्कृत रचना है। इसका प्रमुख विषय राधा और कृष्ण का प्रेम, विरह और पुनर्मिलन है।
गीत गोविन्द 12 सर्गों और 24 प्रबंधों में विभाजित है। इसके गीतों की संरचना के कारण अष्टपदी परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध हुई। इस ग्रंथ का भारतीय संगीत, नृत्य, भक्ति और चित्रकला पर व्यापक प्रभाव पड़ा।
D. क्षेमेन्द्र — बृहत्कथामंजरी (2): 11वीं शताब्दी के कश्मीरी कवि क्षेमेन्द्र ने बृहत्कथामंजरी की रचना की। यह भी गुणाढ्य की प्राचीन बृहत्कथा का संस्कृत रूपान्तर है।
इसलिए सोमदेव का कथासरित्सागर और क्षेमेन्द्र की बृहत्कथामंजरी दोनों एक ही प्राचीन कथा-परंपरा—गुणाढ्य की बृहत्कथा—से संबंधित हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग संस्कृत रचनाएँ हैं।