JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2024

Previous Year Question

अशोक के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. अशोक ने धम्म की जो परिभाषा दी है, वह “राहुलोवादसुत्त” से ली गई है।

  2. अपने राज्याभिषेक के 14वें वर्ष में अशोक ने धम्ममहामात्र नामक एक नवीन प्रकार के कर्मचारियों की नियुक्ति की।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A.

1 और 2 दोनों

B.

न तो 1 न ही 2

C.

केवल 1

D.

केवल 2

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 सही माना गया है। राहुलोवादसुत्त बुद्ध द्वारा राहुल को दिए गए नैतिक उपदेशों से संबंधित है। इसमें विशेष रूप से सत्य, आचरण की शुद्धता और कोई कार्य करने से पहले तथा बाद में उसके नैतिक परिणाम पर विचार करने पर बल मिलता है।

अशोक के भाब्रू अथवा बैराट अभिलेख में जिन सात बौद्ध उपदेशों को भिक्षुओं, भिक्षुणियों और गृहस्थ अनुयायियों द्वारा बार-बार सुनने और मनन करने योग्य बताया गया है, उनमें लघुलोवाद/राहुलोवाद भी शामिल है। इसलिए अशोक की नैतिक धम्म-धारणा और राहुलोवादसुत्त की नैतिक शिक्षा के बीच स्पष्ट संबंध माना गया है।

हालाँकि यहाँ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सावधानी है। अशोक के अभिलेख स्वयं यह शाब्दिक कथन नहीं करते कि “मेरी धम्म की परिभाषा राहुलोवादसुत्त से ली गई है।” अशोक अपने स्तम्भ अभिलेखों में धम्म की व्याख्या दया, दान, सत्य, शुद्धता, कम पाप और अधिक सदाचार जैसे गुणों के माध्यम से करता है। इसलिए कथन 1 को UPPSC द्वारा स्वीकार की गई पारंपरिक व्याख्या के रूप में समझना अधिक सटीक है।

कथन 2 सही है। अशोक के प्रमुख शिलालेख V में कहा गया है कि पहले धम्ममहामात्र नामक अधिकारी नहीं होते थे और अशोक ने अपने राज्याभिषेक के तेरह वर्ष पूरे होने के बाद इन पदों की स्थापना की। तेरह वर्ष पूरे होने के बाद चलने वाला वर्ष 14वाँ वर्ष होता है।

धम्ममहामात्रों का कार्य केवल धार्मिक प्रचार करना नहीं था। वे विभिन्न सम्प्रदायों के बीच धम्म की स्थापना और वृद्धि, लोगों के कल्याण, वृद्धों और असहायों की सहायता तथा कुछ परिस्थितियों में बंदियों के कल्याण और मुक्ति से जुड़े कार्य भी करते थे।

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